प्रथम महिला सांसद ने दलित-शोषितों और नारी शक्ति को दी नई पहचान– सुमन मेश्राम
मिनीमाता की पुण्यतिथि पर दी भावभीनी श्रद्धांजलि

धमतरी- 11 अगस्त जोधापुर डाकबंगला वार्ड में आयोजित मिनीमाता की पुण्यतिथि श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पार्षद सुमन सोमेश मेश्राम शामिल होकर भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें याद करते हुए उनके जीवन और संघर्षों को नमन किया ।मिनीमाता भारत की प्रथम महिला सांसद थीं। उन्होंने न सिर्फ संसद में बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज बनकर इतिहास रचा।
श्रीमती मेश्राम ने कहा मिनीमाता ने अपना पूरा जीवन दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की। उस समय जब महिलाओं की संसद तक पहुंच मुश्किल थी, मिनीमाता ने महिला शिक्षा, महिला स्वावलंबन और नारी सम्मान के लिए काम किया। वे महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं।
मिनीमाता का मानना था कि “शिक्षा ही शोषण से मुक्ति का रास्ता है”। उन्होंने पिछड़े क्षेत्रों में स्कूल खोलने और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए।
सामाजिक समरसता उन्होंने “मानव-मानव एक समान” का संदेश दिया और समाज में समता, बंधुत्व की अलख जगाई।
सांसद के रूप में उन्होंने संसद में भी गरीब, किसान और महिलाओं के मुद्दे उठाए। उनका जीवन सादगी, सेवा और समर्पण का प्रतीक है। इस अवसर पर मनोज खरे, साहिल टंडन, आशीष रात्रे, विनोद डिढोकर ,आर.पी.संभाकर, बल्दी राम कोसरे,शेख लाल गहरवाल, सुरेन्द्र जांगड़े ,कृष्णा टंडन उपस्थित रहे ।


