निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल डिग्री की अनुमति : पूंजीपतियों के बच्चों को आसान डिग्री दिलाने की साजिश – राजा देवांगन

धमतरी। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष राजा देवांगन ने निजी विश्वविद्यालयों को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संबंधी डिग्री देने के प्रस्ताव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह आम छात्रों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों के बीच अब सरकार निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल, नर्सिंग, आयुर्वेद, होम्योपैथी, फिजियोथेरेपी और डेंटल जैसे कोर्स चलाने की अनुमति देने की तैयारी कर रही है। राजा देवांगन ने कहा कि आयुष विश्वविद्यालय ने स्पष्ट रूप से इस प्रस्ताव का विरोध किया है, फिर भी इसे आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चिकित्सा शिक्षा अब मेहनत करने वाले आम छात्रों के लिए रहेगी या पूंजीपतियों और बड़े घरों के बच्चों के लिए आसान डिग्री का रास्ता खोला जा रहा है? गुणवत्ता और सख्त नियंत्रण के बिना निजी संस्थानों को चिकित्सा क्षेत्र में घुसाने का मतलब शिक्षा को व्यवसाय बनाना है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले वर्षों में परीक्षा प्रणाली में बार-बार अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप लगे हैं। ऐसे में चिकित्सा शिक्षा जैसी संवेदनशील विधा को निजी हाथों में सौंपना और भी खतरनाक है। इससे न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी, बल्कि आम छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा और महंगी तथा दूर हो जाएगी। एनएसयूआई धमतरी की स्पष्ट मांग है कि निजी विश्वविद्यालयों को चिकित्सा डिग्री देने का प्रस्ताव तुरंत रोका जाए। लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई हो।