राष्ट्रपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर पंडित राजेश शर्मा ने किया भावपूर्ण नमन
अटल जी का जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों की अमूल्य विरासत — पं. राजेश शर्मा

धमतरी। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न एवं भारतीय राजनीति के युगपुरुष स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर भाजपा प्रदेश कार्य समिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पंडित राजेश शर्मा ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शत-शत नमन किया। उन्होंने कहा कि अटल जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और भारत की गौरवशाली पहचान को मजबूत करने के लिए समर्पित रहा। पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी भारतीय राजनीति के ऐसे महान व्यक्तित्व थे, जिनका सम्मान केवल एक दल तक सीमित नहीं था। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी राजनीतिक दलों के नेता उनके व्यक्तित्व, विचारों, भाषण शैली और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण का सम्मान करते थे। अटल जी ने राजनीति में विचारों की दृढ़ता के साथ संवाद, सहमति और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को हमेशा महत्व दिया। उन्होंने कहा कि अटल जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे एक प्रखर राजनेता, ओजस्वी वक्ता, संवेदनशील कवि, कुशल प्रशासक और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले जननेता थे।
देश को मजबूत बनाने में अटल जी का ऐतिहासिक योगदान
पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी ने भारत को विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई गति प्रदान की। उनके नेतृत्व में पोखरण परमाणु परीक्षण के माध्यम से भारत ने विश्व के सामने अपनी सामरिक क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। वहीं स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं ने देश के सड़क एवं परिवहन नेटवर्क को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि अटल जी के नेतृत्व में देश में बुनियादी ढांचे, संचार, शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हुए।
अटल जी की विचारधारा आने वाली पीढिय़ों के लिए प्रेरणा
पंडित राजेश शर्मा ने कहा कि अटल जी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों और राष्ट्रहित से कभी समझौता नहीं किया। उनके लिए राजनीति पद या प्रतिष्ठा का माध्यम नहीं, बल्कि देश और समाज की सेवा का संकल्प थी। उन्होंने कहा कि अटल जी ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखते हुए राजनीति में शालीनता और संवाद की परंपरा को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी ने पत्रकारिता से लेकर संसद और प्रधानमंत्री पद तक अपने हर दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाया। उन्होंने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

