मुमुक्षु काजल का अभिनंदन, 4 सितंबर को बीकानेर में लेंगी जैन दीक्षा
परिवारजनों ने तिलक, माला एवं खोल भराकर किया सम्मान, संयम पथ पर अग्रसर होने की दी शुभकामनाएं

भखारा। आगामी 4 सितंबर को ब्यावर में आचार्य रामलाल जी महाराज साहब के मुखारबिंद से जैन दीक्षा ग्रहण करने जा रही मुमुक्षु काजल नाहर का परिवारजनों एवं शुभचिंतकों द्वारा आत्मीय अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर दीक्षा पथ पर अग्रसर काजल एवं उनके माता-पिता वीर पिता विनोद लाल नाहर एवं माता राखी नाहर का तिलक, माला एवं खोल भराकर सम्मान किया गया।सुश्री काजल गातापार निवासी पुखराज एवं माडू देवी की सुपौत्री हैँ। कार्यक्रम में कँवर लाल पारख, मंगल चंद नाहर, मोहन लाल नाहर, नगर पंचायत अध्यक्ष ज्योति हरख जैन, ज्ञान चंद नाहर, रोशन पारख, संतोष पारख, गौतम, मयंक, पियूष, मोहित, संयम, ओम, हर्ष, लक्ष्य, सूरज देवी, लता, कविता, रूचि, हिमांशु, रेखा देवी, दर्शना, वीनल सहित परिवारजन उपस्थित रहे। इस दौरान साक्षी, सविता, उषा, रूचि,रेखा, दर्शना, लक्ष्य एवं वीनल ने गीतों के माध्यम से मुमुक्षु काजल के दीक्षा पथ की अनुमोदना की। नगर पंचायत अध्यक्ष ज्योति हरख जैन ने काजल के संयमी जीवन की अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य के लिए मंगलकामनाएं प्रेषित कीं। कार्यक्रम का संचालन हरख ने किया। उपस्थित सभी परिवारजनों एवं शुभचिंतकों ने मुमुक्षु काजल की दीक्षा यात्रा की अनुमोदना करते हुए उनके संयम, साधना एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढऩे की मंगलकामना की।
जैन धर्म में दीक्षा का विशेष महत्व
जैन धर्म में दीक्षा को त्याग, तप, संयम और आत्मशुद्धि का सर्वोच्च मार्ग माना जाता है। सांसारिक मोह-माया एवं भौतिक सुखों का त्याग कर अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम के सिद्धांतों के साथ आध्यात्मिक जीवन अपनाना दीक्षा का मूल उद्देश्य है। दीक्षा आत्मकल्याण के साथ-साथ दूसरों के लिए भी सदाचार, संयम और अहिंसा की प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त करती है। ऐसे कठिन एवं पवित्र संयम पथ को स्वीकार करना अत्यंत गौरव एवं अनुमोदना का विषय माना जाता है।