छत्तीसगढ़ की जेलों में रक्षाबंधन का भावुक दृश्य: 24,257 भाई-बहनों ने सलाखों के बीच निभाया रिश्ते का फर्ज
33 जेलों में हर्षोल्लास से मनाया गया पर्व, 8,689 बंदियों की कलाइयों पर सजा रक्षा-सूत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में इस वर्ष रक्षाबंधन का पावन पर्व भावनाओं, पारिवारिक संवेदनाओं और सुधार की भावना के साथ गरिमामय वातावरण में मनाया गया। राज्य की 5 केंद्रीय जेलों, 22 जिला जेलों और 6 उप जेलों सहित कुल 33 जेलों में हजारों भाई-बहनों का मिलन हुआ। इस दौरान 24,257 भाई-बहनों ने जेलों में निरुद्ध 8,689 बंदियों व बंदिनियों को राखी बांधकर रिश्तों की डोर को मजबूत किया। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरे प्रदेश में रक्षाबंधन का आयोजन सनातन परंपराओं के अनुरूप शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर बहनों ने अपने निरुद्ध भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ, सुरक्षित और बेहतर जीवन की कामना की, वहीं बंदियों ने भी बहनों की रक्षा और जीवन में सुधार के मार्ग पर आगे बढऩे का संकल्प लिया। राज्यभर में 24,110 बहनों ने 8,597 पुरुष बंदियों को राखी बांधी। वहीं महिला जेलों में निरुद्ध 92 महिला बंदिनियों ने अपने 147 भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा। इस प्रकार कुल 8,689 बंदी-बंदिनियों तक रक्षाबंधन का स्नेह पहुंचा।

केंद्रीय जेलों में सबसे अधिक पहुंचीं बहनें
प्रदेश की केंद्रीय जेलों में सबसे अधिक रौनक देखने को मिली। केंद्रीय जेल रायपुर में 1,458 बंदियों को 3,352 बहनों और भाइयों ने राखी बांधी। केंद्रीय जेल जगदलपु में 535 बंदियों तक 1,257 परिजन, जबकि केंद्रीय जेल दुर्ग में 1,271 बंदियों के पास 4,065 भाई-बहन पहुंचे। केंद्रीय जेल बिलासपुर में 1469 बंदियों को 4757 बहनों ने राखी बांधी। महिला जेलों में भी भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जहां बंदिनियों ने अपने भाइयों को राखी बांधकर रिश्तों की गरिमा निभाई।
तिलक, आरती और मिठाई से हुआ स्वागत
जेल प्रशासन ने पूरे आयोजन को पारंपरिक स्वरूप देने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की थीं। जेल परिसरों में आने वाली बहनों का तिलक, अक्षत और आरती से स्वागत किया गया। पूजा सामग्री, राखी और मिठाइयों की व्यवस्था पहले से की गई थी। परिजनों की सुविधा के लिए विशेष प्रतीक्षालय, पेयजल और सहायता काउंटर भी बनाए गए, जिससे मुलाकात के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सुधार की दिशा में सांस्कृतिक पहल – डीजी जेल हिमांशु गुप्ता

डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे सनातन पर्व बंदियों में मानसिक शांति, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों का संचार करते हैं। ऐसे आयोजन उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोडऩे और सुधार की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सलाखों के पीछे भी पारिवारिक रिश्तों की गर्माहट बनी रहना इस बात का प्रमाण है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, मानवीय संवेदनाएं और पारिवारिक संबंध कभी समाप्त नहीं होते। रक्षाबंधन का यह आयोजन जेलों में सुधार, भाईचारे और नए जीवन की प्रेरणा का संदेश देकर संपन्न हुआ। रक्षाबंधन का यह भावुक क्षण यह संदेश देता है कि रक्षासूत्र का प्रभाव सलाखों की सीमाओं से परे है जो जीवन में नये सबेरे व सुधार की प्रेरणा देता है।