धूल के गुबार से हवा हो रही प्रदूषित, सांस और एलर्जी से जुड़ी शिकायतों का बढ़ रहा खतरा, निगम के पास नहीं है स्थायी समाधान
बारिश थमते ही सड़को पर उडऩे लगती है धूल, सभी प्रमुख मार्गो की यही है दशा
धूल से निजात के लिये ठोस उपाय की है आवश्यकता

धमतरी। शहर के मुख्य मार्गो जैसे अम्बेडकर चौक से लेकर रत्नाबांधा चौक, घड़ी चौक से सिहावा चौक और अर्जुनी चौक तक इधर सिहावा चौक से नहर नाका चौक और आगे कोलियारी तक व रत्नाबांधा चौक से मुजगहन तक आवागमन करने के दौरान धूल से सराबोर होना आम बात है। अन्य मौसम में भी इन मार्गो पर धूल की समस्या रहती है। वहीं बारिश के मौसम में यह समस्या कई गुणा बढ़ गई है। निगम के पास उक्त समस्या से निजात दिलाने कोई ठोस उपाय नहीं है। वर्तमान व पिछले कई वर्षो से निगम द्वारा धूल से राहत दिलाने सड़को पर झाड़ु लगाना ही एक मात्र विकल्प रहा है। सालों पहले निगम में एक स्वीपिंग मशीन हुआ करती थी जिसके माध्यम से शहर के मुख्य मार्गो से धूल साफ किया जाता था। लेकिन जल्दी ही यह मशीन मेंटेनेस ज्यादा और काम कम करने लगी और वाहन के उपयोग की लागत भी ज्यादा खर्चीला रहा इसलिए धीरे-धीरे उक्त स्वीपिंग मशीन का उपयोग बंद हो गया। अब सालों से धूल से राहत दिलाने ठोस उपाय नहीं हो रहे है।
फोरलेन सड़क निर्माण से मिलेगी राहत
बता दे कि सिहावा चौक से कोलियारी तक व रत्नाबांधा चौक से मुजगहन तक लगभग 10 किमी के सड़क निर्माण हेतु लगभग 100 करोड़ की स्वीकृति मिली है। निर्माण प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। उक्त सड़क पर सबसे ज्यादा धूल की समस्या रहती है अब लोगों में उम्मीद बढी है कि उक्त फोरलेन सड़क निर्माण के बाद दोनो मार्ग में धूल की समस्या काफी कम होगी। लोगों का कहना है कि यदि ड्रेन टू ड्रेन सड़क का निर्माण होगा तो यह समस्या काफी हद तक कम हो जायेगी।
राहगीर, व्यापारी व निवासी है परेशान
बारिश के मौसम में शहरवासियों को जलभराव और कीचड़ से राहत मिलती भी नहीं कि बारिश थमते ही सड़कों पर उडऩे वाली धूल नई परेशानी खड़ी कर देती है। शहर की कई प्रमुख और आंतरिक सड़कों पर बारिश के बाद जमा मिट्टी, सड़क किनारे पड़ी धूल और निर्माण कार्यों से निकलने वाली मिट्टी वाहनों की आवाजाही के साथ हवा में उडऩे लगती है। इससे कई स्थानों पर सड़क पर धूल का गुबार दिखाई देता है और राहगीरों व आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान सड़कों पर जमा मिट्टी और गाद जब सूखने लगती है तो वाहनों के गुजरने पर यह महीन धूल के रूप में हवा में फैल जाती है। दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। पीछे से आने वाले वाहनों के पहियों से उडऩे वाली धूल सीधे राहगीरों और वाहन चालकों के चेहरे तक पहुंचती है। कई जगहों पर दुकानदारों को भी दिनभर धूल का सामना करना पड़ रहा है। दुकानों में रखे सामान और सड़क किनारे खड़ी गाडिय़ों पर धूल की परत जम रही है।
धूल के कारण बढ़ रहा स्वास्थ्य पर असर
सड़क की धूल केवल असुविधा का कारण नहीं है, बल्कि लगातार धूल भरी हवा में रहने से आंखों, नाक और गले में जलन, छींक, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पहले से सांस संबंधी संवेदनशीलता रखने वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को इससे ज्यादा परेशानी होने की आशंका रहती है। शहरवासियों का कहना है कि बारिश के बाद सड़क किनारे जमा मिट्टी की सफाई, नियमित झाड़ू के साथ जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय किए जाने चाहिए।
