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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, द्वारा शिक्षक दिवस पर विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका विषय पर विशेष कार्यक्रम का हुआ आयोजन

शिक्षक केवल ज्ञान नहीं, संस्कारों से गढ़ते हैं राष्ट्र का भविष्य

धमतरी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, धमतरी द्वारा शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा जगत से जुड़े गणमान्य अतिथियों एवं शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय बहन श्रीमती सुमन तिवारी , डायरेक्टर, विद्याकुंज इंग्लिश मीडियम स्कूल, धमतरी; बहन श्रीमती श्रुति साहेब , डायरेक्टर, मिलेनियम स्कूल, धमतरी; श्रीमती चंपा चंद्राकर , प्राचार्य, पोटीयाडीह तथा आदरणीय राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी जी, संचालिका, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, धमतरी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ परमात्म स्मृति एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम का संचालन बी.के. प्राजक्ता दीदी जी द्वारा किया गया।

बच्चों में श्रेष्ठ संस्कार डालना शिक्षक का दायित्व

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती सुमन तिवारी ने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं, बल्कि उनमें श्रेष्ठ संस्कारों का निर्माण करना, उन्हें प्रेरित करना तथा उनके गुणों एवं विशेषताओं को उजागर करना भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही दिशा देने का कार्य करता है और इसी से राष्ट्र के भविष्य का निर्माण होता है।

श्रीमती चंपा चंद्राकर ने अपने शिक्षकीय अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक जिन भी बच्चों को पढ़ाया, उनमें सदैव अच्छे संस्कार विकसित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक चाहे विद्यालय के बच्चों को पढ़ाए या परिवार के बच्चों को, उसका प्रयास उनके जीवन को श्रेष्ठ बनाने का होना चाहिए। यही सच्चे शिक्षक की पहचान है।

शिक्षक केवल पद नहीं, श्रेष्ठ संस्कारों का समूह

श्रीमती श्रुति साहेब जी ने कहा कि शिक्षक केवल एक पद नहीं, बल्कि श्रेष्ठ संस्कारों का समूह है। सच्चा शिक्षक बच्चों की कमियों को नहीं, बल्कि उनकी खूबियों को देखता है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब शिक्षक सशक्त होंगे।

शिक्षा के साथ जीवन मूल्यों की भी आवश्यकता

राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी जी ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारा सर्वोच्च शिक्षक स्वयं परमपिता परमात्मा है और शिक्षक उनके ज्ञान एवं श्रेष्ठ संस्कारों को समाज तक पहुंचाने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक को अपनी गरिमा एवं श्रेष्ठ आचरण को बनाए रखते हुए बच्चों को आदर्श बनाने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि शिक्षक की सोच, व्यवहार और शुभ भावनाओं का प्रभाव बच्चों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल डिग्री लेना, नौकरी करना, घर बनाना और धन कमाना ही नहीं सिखाया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें मूल्यनिष्ठ एवं संस्कारवान जीवन जीना भी सिखाया जाना चाहिए। ब्रह्माकुमारीज द्वारा सिखाया जाने वाला राजयोग आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से श्रेष्ठ जीवन जीने की कला सिखाता है।

राज्यपाल पुरस्कार हेतु चयनित शिक्षकों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान शैक्षणिक सत्र 2027 के राज्यपाल पुरस्कार हेतु चयनित शिक्षक श्री आकाश गिरी गोस्वामी जी, व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, खरतुली, सुविख्यात राष्ट्रीय रंगकर्मी एवं साहित्यकार तथा कोषाध्यक्ष, जिला हिंदी साहित्य समिति, धमतरी, एवं सुश्री पलविंदर कौर गिल , व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला, मुजगहन का विशेष सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी शिक्षकों को पट्टा, श्रीफल, अभिनंदन पत्र एवं ईश्वरीय सौगात भेंट कर सम्मानित किया गया।

नवनिर्माणाधीन शिवसरोवर में राजयोग मेडिटेशन का आयोजन

इस अवसर पर बताया गया कि नवनिर्माणाधीन शिवसरोवर परिसर में प्रतिदिन सुबह एवं शाम राजयोग मेडिटेशन का कोर्स कराया जाता है। इस राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से मन को शांत एवं एकाग्र करने, सकारात्मक चिंतन विकसित करने तथा जीवन में श्रेष्ठ संस्कारों एवं मूल्यों को अपनाने का अभ्यास कराया जाता है। उपस्थित सभी लोगों को राजयोग मेडिटेशन का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र, संस्कार और व्यक्तित्व का निर्माता तथा राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने वाला सच्चा राष्ट्र निर्माता है। शिक्षा में ज्ञान के साथ संस्कार और जीवन मूल्यों का समावेश ही विकसित एवं श्रेष्ठ भारत की मजबूत नींव बन सकता है।

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