नारियल पौधरोपण से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भारतीय किसान संघ की पहल
भारतीय किसान संघ की पहल, ग्राम भाठागांव में पौधरोपण कर किसानों को फलदार पौधों की खेती के लिए किया प्रोत्साहित

धमतरी- किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि में विविधता को प्रोत्साहित करने, फलदार एवं बहुउपयोगी पौधों की खेती को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से भारतीय किसान संघ, जिला धमतरी द्वारा ग्राम भाठागांव में नारियल पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल के माध्यम से किसानों को पौधरोपण के पर्यावरणीय महत्व के साथ-साथ फलदार पौधों की खेती से जुड़ी दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष लालाराम चंद्राकर, जिला महामंत्री दुलार सिन्हा सहित जिला एवं ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी उपस्थित रहे। उद्यानिकी विभाग की ओर से कुरूद की ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी श्रीमती अर्चना मंडावी तथा विभागीय कर्मचारियों ने सहभागिता निभाई। इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों एवं अधिकारियों ने नारियल के पौधे रोपित कर किसानों को हरियाली संवर्धन और उपयोगी पौधों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कृषि में विविधता से बढ़ सकती हैं आय की संभावनाएं
कार्यक्रम में फलदार पौधों के रोपण को किसानों के लिए दीर्घकालिक निवेश के रूप में अपनाने की संभावनाओं पर जोर दिया गया। पारंपरिक फसलों के साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फलदार एवं बहुउपयोगी पौधों की खेती अपनाने से कृषि में विविधता लाई जा सकती है। इससे भविष्य में अतिरिक्त आय के अवसर विकसित होने की संभावना रहती है। नारियल के पौधे विभिन्न उपयोगों के कारण आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हालांकि, इसकी खेती से अपेक्षित लाभ प्राप्त करने के लिए स्थानीय जलवायु, मिट्टी की प्रकृति, सिंचाई की सुविधा और बाजार की मांग का आकलन आवश्यक है।
वैज्ञानिक मार्गदर्शन से खेती को बनाया जा सकता है लाभकारी
पौधरोपण के दौरान किसानों को यह संदेश दिया गया कि फलदार पौधों का चयन करते समय उद्यानिकी विशेषज्ञों की सलाह, पौधों की उचित देखभाल, सिंचाई और समय पर प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वैज्ञानिक तरीके से पौधों का रोपण एवं संरक्षण करने से उनके बेहतर विकास की संभावनाएं बढ़ती हैं। साथ ही, बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर खेती की योजना बनाने से किसानों को भविष्य में आर्थिक लाभ प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों के 202 कृषकों ने कुल 4,126 नारियल पौधे लगाने के लिए सहमति दी है। कृषकों की मांग और स्वीकृति के आधार पर नारियल बोर्ड, कोण्डागांव से पौध प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर गयी थी |सितंबर को संबंधित मैदानी अधिकारी कृषकों की सूची एवं आवश्यक प्रकरणों के साथ कोण्डागांव पहुंचकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत पौध प्राप्त किए थे ।। इसके बाद स्वीकृत संख्या के अनुरूप पौधों का कृषकवार वितरण किया गया था ।
महानदी जागरूकता अभियान ने रखी थी मजबूत नींव
यहाँ बताना लाज़मी होगा कि धमतरी में नारियल रोपण की यह पहल अचानक नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर किए जा रहे निरंतर प्रयासों की अगली कड़ी है। महानदी जागरूकता अभियान—माँ (महानदी अवेकनिंग अभियान ) के अंतर्गत पिछले वर्ष जुलाई में फरसियां से गणेशघाट तक लगभग 14 किलोमीटर लंबी पट्टी में करीब 4,000 नारियल पौधों का वृहद रोपण किया गया था।
इस अभियान का शुभारंभ कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्वयं नारियल पौधा रोपकर किया। जनप्रतिनिधियों, सरपंचों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता करते हुए पौधे लगाए। इस पहल ने यह संदेश दिया कि नदी संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण तभी स्थायी बन सकते हैं, जब उन्हें जनजीवन और स्थानीय आजीविका से जोड़ा जाए।
नगरी की धरती पर नारियल की संभावनाएं
नगरी क्षेत्र की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों को नारियल वृक्ष के लिए अनुकूल पाए जाने के बाद इसके विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं। कृषि विज्ञान केंद्र एवं विशेषज्ञ संस्थानों के माध्यम से किए गए परीक्षणों से भी यहां नारियल रोपण की संभावनाओं को बल मिला है। ऐसे में किसान अपने खेतों, मेड़ों और घरों के आसपास उपलब्ध उपयुक्त स्थानों का उपयोग कर अतिरिक्त आय का आधार तैयार कर सकते हैं।
नारियल एक बहुवर्षीय फसल है। प्रारंभिक वर्षों में देखभाल की आवश्यकता के बाद यह लंबे समय तक उत्पादन देने वाली फसल बन सकती है। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ एक अतिरिक्त और दीर्घकालीन आय का स्रोत विकसित करने का अवसर मिलेगा। खेत की ऐसी भूमि या मेड़, जिसका खेती में सीमित उपयोग होता है, वहां नारियल लगाकर किसान अपनी उपलब्ध कृषि परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे।
एक पौधा, अनेक संभावनाएं
नारियल को केवल फल देने वाला वृक्ष मानना इसके व्यापक महत्व को सीमित कर देना होगा। इसके फल, पानी, तेल, रेशा और अन्य उत्पादों का विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग होता है। भविष्य में स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन की गतिविधियों को बढ़ावा मिलने पर इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी निर्मित हो सकते हैं।
इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय केवल एक या दो पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहेगी। कृषि के साथ उद्यानिकी गतिविधियों का समावेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक विविध और टिकाऊ बनाने में सहायक हो सकता है।
सेमरा में तैयार हो रही भविष्य की पौधशाला
इस अभियान की दीर्घकालिक सफलता के लिए ग्राम सेमरा में नारियल नर्सरी की स्थापना की जा रही है। इससे आने वाले वर्षों में जिले में गुणवत्तापूर्ण पौधों की स्थानीय एवं सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में मदद मिलेगी। स्थानीय स्तर पर पौध उपलब्ध होने से किसानों को समय पर रोपण सामग्री मिल सकेगी और नारियल क्षेत्र के क्रमिक विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा।
उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को पौध रोपण के लिए उपयुक्त स्थान, पौधों के बीच दूरी, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, पौध संरक्षण और प्रारंभिक देखभाल के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।
पौधरोपण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और ग्रामीण परिवेश को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय किसान संघ, जिला धमतरी की यह पहल किसानों को पर्यावरण संरक्षण के साथ कृषि की दीर्घकालिक संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में सराहनीय प्रयास है। ऐसे कार्यक्रमों से ग्रामीण क्षेत्रों में पौधरोपण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है।
