ग्राम परसतराई के होनहार युवा आकाश साहू ने बनाया इन्वेंशन स्मार्ट हेलमेट, स्मार्ट सिक्योरिटी म्यूजियम सिस्टम, स्मार्ट गड्ढा चेतावनी सिस्टम
दुर्घटनाओं व उनमें मौतो का आंकड़ा घटाने कीमती सामानों की चोरी रोकना है उद्देश्य, प्रोत्साहन से कर सकते है जिले का नाम रोशन
12वीं तक शिक्षित है आकाश, कमजोर आर्थिक स्थिति व परिवारिक जिम्मेदारी के चलते नहीं कर पाये उच्च शिक्षा ग्रहण
एसपी, कलेक्टर के समक्ष दिया प्रजेंटेशन, मिली सराहना

धमतरी । जब कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति हो तो परिस्थितियां भी रुकावट नहीं बन पाती। इसे साबित करने धमतरी जिले के ग्राम परसतराई निवासी 28 वर्षीय होनहार युवा आकाश साहू जुटे हुए है। कक्षा 12वीं तक शिक्षित है उनके पिता किसान व मजदूर है। आकाश भी कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते पढ़ाई आगे जारी नहीं करते हुए परिवार चलाने में हाथ बटा रहे है। वर्तमान में वे कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के सहयोग से संचालित एआई कक्षा में अपना ज्ञान कौशल बढ़ा रहे है। आकाश ने बताया कि वर्तमान में उन्हें एक लैपटॉप की सख्त आवश्यकता है जिससे वे अपनी रिसर्च को और तेजी से आगे बढ़ा पायेंगे। आकाश ने कहा कि उक्त मॉडल को और बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है और मानव जीवन को सुविधायुक्त व सुरक्षित बनाने उनका उद्देश्य है। बिना किसी उच्च शिक्षा व विशेषज्ञो के मार्गदर्शन के अपनी रुचि, जनसुरक्षा व साइंस के क्षेत्र में कुछ अच्छा करने की सोच से उन्होने एक नहीं तीन जनहितकारी विज्ञान मॉडल बनाये है। शुरुवाती दौर में यह प्रतीत हो रहा है कि उक्त मॉडल को प्रैक्टिली लागु कर दिया जाये तो यह इंसानों की व वाहनों की सुरक्षा के साथ ही कीमती सामानों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकती है। होनहार युवा आकाश साहू ने तीन इन्वेंशन स्मार्ट हेलमेट, स्मार्ट सिक्योरिटी म्यूजियम सिस्टम, स्मार्ट गड्ढा चेतावनी सिस्टम मॉडल बनाये है।
स्मार्ट सिक्योरिटी म्यूजियम सिस्टम से कीमती सामानों की चोरी रोकना उद्देश्य
आकाश ने बताया कि स्मार्ट सिक्योरिटी म्यूजियम सिस्टम सेंसर तकनीक और आटोनेशन के सिंद्धांत पर कार्य करता है इसमें मुख्य में रुप आईआर व प्रॉक्सीमिटी सेंसर और सर्वो मोटर का उपयोग होता है। इसका सिद्धांत यह है कि जब कोई वस्तु सेंसर की किरणों के सामने से हटती है या सेंसर उस हलचल को डिटेक्ट करता है, तो सेंसर माइक्रो-कंट्रोलर को सिग्नल भेजता है और कंट्रोलर तुरंत दोनों सर्वो मोटर से जुड़े दरवाजों को बंद करने का आदेश देता है। इससे चोर अंदर ही लॉक हो जाता है। इस सिस्टम का उद्देश्य म्यूजियम, ज्वेलरी शॉप और बैंकों में रखी कीमती वस्तुओं की चोरी रोकना। मानव सुरक्षा गार्ड पर निर्भरता कम करके एक ऑटोमेटिक सुरक्षा प्रणाली बनाना। चोर के भागने के रास्ते (एंट्री-एक्जिट) को तुरंत बंद करके उसे पकडऩा। कम लागत में एक स्मार्ट सुरक्षा मॉडल बनाना जो वास्तविक जीवन में इस्तेमाल हो सके।
हेलमेट पहनने और शराब से दूर रहने पर ही स्टार्ट होगी बाइक, दुर्घटना की सूचना भी मोबाइल पर मिलेगी
आकाश साहू ने आईओटी आधारित स्मार्ट हेलमेट के संबंध में बताया कि सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आईओटी आधारित स्मार्ट हेलमेट प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस तकनीक की खासियत यह है कि बिना हेलमेट पहने और शराब के नशे में बाइक स्टार्ट नहीं हो सकेगी। वहीं, दुर्घटना होने पर वाहन चालक के परिवार या दोस्तों को मोबाइल ऐप के माध्यम से तत्काल सूचना मिल सकेगी। इस स्मार्ट हेलमेट में ईएसपी 32 माइक्रोकंट्रोलर के साथ विभिन्न सेंसर का उपयोग किया गया है। हेलमेट में लगे कफ सेंसर से यह पता लगाया जाएगा कि चालक ने हेलमेट पहना है या नहीं। यदि हेलमेट नहीं पहना गया है तो बाइक का इंजन स्टार्ट नहीं होगा। इसी तरह एमक्यू-3 अल्कोहल सेंसर के माध्यम से चालक के आसपास अल्कोहल की मात्रा की जांच की जाएगी। निर्धारित सीमा से अधिक अल्कोहल पाए जाने पर सिस्टम बाइक की इग्निशन सप्लाई बंद कर देगा, जिससे नशे की हालत में वाहन चलाने पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। प्रोजेक्ट में एसडब्ल्यू-420 वाइब्रेशन सेंसर भी लगाया गया है, जो दुर्घटना या तेज झटके की स्थिति का पता लगाने में सहायक होगा। दुर्घटना का संकेत मिलने पर ऐप के माध्यम से परिवार या दोस्तों को तत्काल नोटिफिकेशन भेजने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा बाइक की लाइव स्थिति भी मोबाइल पर देखी जा सकेगी।
सड़़क में गड्ढो से होने वाली दुर्घटनाओं में आ सकती है कमी
आकाश ने स्मार्ट गड्ढा चेतावनी सिस्टम मॉडल के संबंध में बताया कि इस प्रोजेक्ट में अल्ट्रासोनिक सेंसर लगाया गया है। यह सेंसर जमीन की दूरी लगातार मापता रहता है। इसके साथ माइक्रोकंट्रोलर का इस्तेमाल किया गया है, जो सेंसर से प्राप्त जानकारी का विश्लेषण करता है। इस सिस्टम का मुख्य सिद्धांत अल्ट्रासोनिक साउंड रिफ्लेक्शन पर आधारित है। एचसी -एसआर सेंसर 40 किलोहट्र्ज की ध्वनि तरंगें भेजता है और उनसे वापस आने में लगने वाले समय के आधार पर जमीन की दूरी मापता है। यदि सड़क समतल है तो सेंसर को जमीन की दूरी लगभग समान मिलती है, लेकिन जैसे ही सामने गड्ढा आता है, दूरी में अचानक बदलाव होता है। सिस्टम इस बदलाव को पहचानकर गड्ढे की मौजूदगी का संकेत देता है। प्रोजेक्ट में 12 सेंटीमीटर की थ्रेशोल्ड वैल्यू निर्धारित की गई है। सेंसर से मिलने वाली दूरी इस निर्धारित मान से अधिक होने पर सिस्टम गड्ढे की आशंका पहचान सकता है। इसके बाद बजर या ब्लिंक ऐप के माध्यम से चेतावनी देने की व्यवस्था की गई है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य केवल वाहन चालकों को गड्ढों के प्रति सतर्क करना ही नहीं, बल्कि नगर पालिका को भी खराब सड़कों की जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि समय रहते मरम्मत कराई जा सके। इससे सड़क दुर्घटनाओं और वाहनों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
