गंगरेल में बढ़ी पर्यटकों की संख्या लेकिन अव्यवस्था है हावी
असामाजिक तत्वों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर की जाती है शराबखोरी व हुड़दंग

खुलेआम होता है प्रतिबंधित डिस्पोजल का उपयोग, है गंदगी का मुख्य कारण
धमतरी। गंगरेल बांध प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा बांध है। बांध की खूबसूरती और आकर्षक नजारे सभी को अपनी ओर आकर्षित करते है। गंगरेल बांध मां अंगारमोती के किनारे है। इसलिए यहां भक्तों की भी अपार आस्था है। इसलिए पर्यटकों की संख्या और बढ़ जाती है। लेकिन बांध क्षेत्र में अव्यवस्था हावी है। जिससे अन्य पर्ययकों को परेशान होना पड़ता है।

ज्ञात हो कि गंगरेल बांध में ठंड शुरु होते ही व दीपावली पर्व के बाद से पर्यटन में धूम आया है। यहां लगातार पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं मां अंगारमोती की बड़ी मान्यता है। यहां भक्तों की सभी मुरादे पूरी होती है। दूर दूर से यहां भक्त माता से मन्नत मांगने आते है। और मन्नत पूरी होने पर अपने वचन अनुसार बकरे की बलि या अन्य वस्तु दी जाती है। इसलिए हर शुक्रवार और रविवार को गंगरेल में मेले जैसे माहौल रहता है। हजारों भक्त यहां पहुंचते है। लेकिन कई ऐसे लोग होते जो यहां पहुंचकर अव्यवस्था को बढ़ावा देते है। प्रतिबंधित डिस्पोजल का यहां खुलेआम उपयोग होता है। जिससे पर्यावरण को तो नुकसान होता ही है। साथ ही गंदगी पसर जाती है। मंदिर कुछ दूर हजारों डिस्पोजल के ढेर फैले हुए है। वहीं गंगरेल पहुंचने वाले कई लोग शराब सेवन करने के दौरान नियमों की धज्जियां उड़ाते है। खुलेआम शराब खोरी होती है। कई बार तो बाटल को फोड़ भी दिया जाता है। जिससे अन्य लोंगो को चोट पहुंचती है। कुछ शराबी हुड़दंग भी करते है। लड़ाई झगड़ा, गाली गलौज से माहौल खराब करते है। इन्हें किसी का डर नहीं रहता। न ही पुलिस का न ही मंदिर ट्रस्ट का। गंगरेल पहुंचे महिला संतोषी सोनकर, कामना शिंदे और कल्पना सोनकर ने चर्चा के दौरान बताया कि वे बलौदाबाजार से मां अंगारमोती धाम पहुंचे है। मंदिर में माता के दर्शन कर सुकुन मिला, शांति की अनुभूति हुई लेकिन आसपास शराबियों के कारण असुरक्षा महसूस हुई। शराबी अपशब्दों का प्रयोग भी बेझिझक करते है। डिस्पोजल पर प्रतिबंध यहां होना चाहिए पुलिस की व्यवस्था कम से कम विशेष दिनों में होनी चाहिए। ताकि शराबियों और हुड़दंगियों में नियंत्रण रहे। मूत्रालय में भी भारी गंदगी और भीड़ की स्थिति रही जिससे महिलाओं को काफी परेशानियां हुई।
