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हरख एवं ज्योति जैन ने नेत्रदान का लिया संकल्प

मृत्युपरान्त नेत्रदान करेंगे हरख ज्योति

भखारा-नेत्रदान एक ऐसा पुण्यमय कार्य है जिसके ज़रिए किसी व्यक्ति की आंखें दान करके, किसी नेत्रहीन व्यक्ति की दृष्टि लाई जा सकती है. नेत्रदान को महादान कहा जाता है. नेत्रदान के ज़रिए मृत व्यक्ति मृत्यु के बाद भी दूसरों की दृष्टि में जीवित रह सकता है.नेत्रदान की कड़ी में स्वयं पहल करते हुए स्थानीय हरख जैन एवं उनकी पत्नी ज्योति जैन ने नेत्रदान का फॉर्म भरकर भखारा भठेली के सामुदायिक हॉस्पिटल में जमा करा दिया।इस अवसर पर डॉ गौरव बंगानी, ग्रामीण चिकित्सा सहायक डॉ नीतू बिरहा ग्रामीण चिकित्सा सहायक, चित्रेश साहू नेत्र सहायक अधिकारी, डीलेश दादर लैब टेक्नीशियन, एम एल साहू एन एम ए, हितेंद्र नेताम फार्मासिस्ट, भुनेश्वर साहू लैब टेक्नीशियन, शेखर मैत्रेय आर एच ओ, जानकी साहू एमटी भुनेश्वरी साहू ड्रेसर, हेमलता सहारे स्टाफ नर्स, मीनाक्षी ध्रुव स्टाफ नर्स, कामिनी साहू ओपीडी अटेंडर, रूपेश्वरी चंदेल वार्ड आया, तोशिका जैन हर्ष जैन आदि सहित अन्य लोग उपस्थित थे।उनके इस पहल के लिये डॉ. जे एस. खालसा (वरिष्ठ नेत्रदान चिकित्सक ),डॉ. राजेश सूर्यवंशी (नेत्र सर्जन),डॉ. यू.एस. नवरत्न खण्ड चिकित्सा अधिकारी (सामु.स्वा.केन्द्र कुरूद)ने अनुमोदना की.उल्लेखनीय है जैन परिवार कोई ना कोई सामाजिक कार्य करता रहता है एवं अग्रणी रहता है। लगातार रक्तदान कार्य एवं जनजागरण, निर्धन कन्या विवाह, मोटिवेशन कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार मार्गदर्शन, यातायात अवेयरनेस, यूथ एपावरमेंट सहित अनेक क्षेत्रों में ये कार्यरत हैँ।जैन दम्पति के इस पहल पर रेडक्रॉस समिति, लायन्स क्लब, सार्थक विशेष बच्चों की संस्था,शासकीय महाविद्यालय परिवार, प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईश्वरीय संस्थान, गायत्री परिवार भारतीय जैन संगठन आदि ने प्रस्सन्नता ज़ाहिर करते हुए साधुवाद किया।नेत्रदान एक ऐसा माध्यम है जिसके तहत किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आंखें उन लोगों को दान की जाती हैं, जो आंखों की बीमारी के कारण अपनी दृष्टि खो चुके हैं। यह एक बहुत ही सम्मानजनक कार्य है, जिसका उद्देश्य केवल उन लोगों की मदद करना नहीं है, जिन्होंने कॉर्नियल अंधेपन के कारण अपनी कॉर्निया की दृष्टि खो दी है।

नेत्रदान से जुड़ी कुछ खास बातें

नेत्रदान के लिए किसी खास उम्र की ज़रूरत नहीं होती.
नेत्रदान के लिए कोई शुल्क नहीं देना होता. नेत्रदान के लिए नज़दीकी आई बैंक से संपर्क किया जा सकता है.नेत्रदान के लिए शपथ ली जा सकती है.
नेत्रदान के लिए मृत्यु के बाद 6-8 घंटे के अंदर आंखें निकाल लेनी चाहिए. नेत्रदान के लिए मृत व्यक्ति के रिश्तेदारों की सहमति लेनी होती है. नेत्रदान के बाद कॉर्निया को 96 घंटों के अंदर प्रत्यारोपित किया जाता है.

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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