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न्यूनतम समर्थन मूल्य सुरक्षा गारंटी कानून की मांग पर सरकार बनी हुई है गूंगी बहरी-घनाराम साहू

किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर सिंह डिल्लेवाल 58 दिनों से बैठे हैं अनशन पर

किसान नेता घनाराम साहू ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून व किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर . सिंह डिल्ले वाल खनोरी बार्डर की धरती पर 58 दिनों से अनशन पर बैठे हुए हैं लगातार उनका शरीर छीन होते जा रहा है देश की माटी से जुडे यह गाथा किसी कटु व्यंग्य से कम नहीं है सत्ता की गलियारों में व्यस्तता का आलम है जैसा सूखा पत्ता भी अगर गिर जाए तो कुर्सी डगमगाने लगते हैं किसान ट्रैक्टर ट्राली के साथ बैठे हुए हैं लेकिन अन्नदाता के साथ मिलने का सत्ता के पहरेदारो को फुर्सत ही नहीं है. गजब ड्रामा चल रहा है कुर्सियां मस्त है किसान त्रस्त है किसानो की लड़ाई किसी मोलभाव का नहीं है अपने हक की है स्वामीनाथन आयोग कमेटी की सिफारिश मूल्य आज भी लागू नहीं है यह कागजों में ही धूल खा रही है 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून के लिए ही किसान वर्षों से संघर्षरत है. किसान एमएसपी नहीं मांग रहा है न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून बनाने की मांग कर रहा है और यह कानून बनाने की बात स्वयं केंद्र सरकार किसानों से वादा कर चुके हैं. किसान अपने उत्पादन का समुचित उत्पादन लागत व जीवन यापन करने के लिए फसलो पर न्यूनतम समर्थन मूल्य सुरक्षा गारंटी कानून की मांग कर रहा है। बिचौलिए व व्यापारी किसानो के उत्पादन को औने पौने कौड़ीयो के दाम में लूटपाट ना कर सके उनकी सुरक्षा हो सके जैसा कि अभी तक किसानों के साथ होते आ रहा है.सरकार को इससे उनके खजाने पर कोई भार नहीं पड़ेगा सरकार को खरीदना ही पड़ेगा ऐसा कोई कानून किसान नहीं मांग रहा है. सरकार को बस एक कानून स्पष्ट रूप से बना देना चाहिए कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे कोई भी व्यापारी या कंपनी किसान के उत्पादन को ना खरीद सके पर मोटे चंदा देने वाले व्यापारी या कंपनी निश्चित रूप से नाराज हो जाएंगे यही पेंच सरकार के साथ फंसा हुआ है और व्यापारी और कॉरपोरेट जगत को सरकार नाराज नहीं करना चाहती भले ही किसान कर्ज की जंजाल मे फंसकर कर आत्महत्या कर ले। सरकार समस्या को सुलझाने के बजाय संवाद भी नहीं करना चाहती है इसी के परिणाम स्वरूप 58 दिन से जगजीत सिंह डिल्ले किसानो की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हुए हैं मरने की कगार पर पहुंच चुका है लेकिन सरकार मौन धारण किए हुए हैं चुनाव में मस्त है और इधर किसान त्रस्त है। यही सरकार कारपोरेट जगत का 16 लाख करोड़ का कर्ज माफ करने में तनिक भी नहीं हिचकीचाती । सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून का वायदा भी अन्य कानून की तरह दूर क्षितिज में धुंधला होते दिखाई दे रहा है। अतः हम सभी किसानों की मांग है कि तत्काल किसानों के हित में 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून इस देश में लाई जाए व जगजीत सिंह ढिल्लों वाल व किसान संगठन से संवाद कर इनकी अंनशन रूकवाई जाए।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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