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होलिका दहन हेतु कई स्थानों पर लगाया गया अरंडी का पेड़

आज माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जा रहा है बसंत पंचमी पर्व


धमतरी। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन माता सरस्वती की पूजा होती है। इसी दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत होती है। छत्तीसगढ़ में बसंत पंचमी का का विशेष महत्व है। इस दिन होलिका दहन हेतु अरंडी का पेड़ होलिका दहन वाले स्थान पर लगाया जाता है। जिसके पश्चात इसी स्थान पर होलिका दहन किया जाता है। आज भी कई स्थानों पर अरंडी का पेड़ लगाया गाय। ज्ञात हो कि आज बसंत पंचमी मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान और शिल्प-कला की देवी माना जाता है। आज बसंत पंचमी को श्री पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। बसंत पंचमी का दिन सभी शुभ कार्यो के लिये उपयुक्त माना जाता है। इसी कारण से बसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहूर्त के नाम से प्रसिद्ध है और नवीन कार्यों की शुरुआत के लिये उत्तम माना जाता है। इस साल बसंत पंचमी को लेकर इस साल असमंजस की स्थिति है। दृग पंचांग के अनुसार इस साल पंचमी तिथि 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट से शुरू हो रही है जो 3 फरवरी को 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस दिन पंचमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच में व्याप्त रहती है उस दिन को सरस्वती पूजा के लिये उपयुक्त माना जाता है। हिंदू कैलेंडर में सूर्योदय और दोपहर के मध्य के समय को पूर्वाह्न के नाम से जाना जाता है। इस वजह से अधिकांश स्थानों पर 2 फरवरी, रविवार को बसंत पंचमी मनाई जा रही है। हालांकि कुछ स्थानों पर उदया तिथि के अनुसार त्योहार मनाया जाता है। जहां उदया तिथि के अनुसार त्योहार मनाया जाता है, वहां बसंत पंचमी 3 फरवरी, सोमवार को मनाई जाएगी।

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