कुरुद कवि सम्मलेन में देशप्रेम, युवा जागरूकता, किसान की बदहाली और देश की शहादत पर कई भावनात्मक कविताओं का किया गया पाठ

मूलचन्द सिन्हा, कुरुद: वंदे मातरम परिवार द्वारा आयोजित होलिका दहन संध्या में एक शानदार रस रंग कवि सम्मेलन का आयोजन कुरुद में किया गया। इस कार्यक्रम में देशप्रेम, युवा जागरूकता, किसान की बदहाली और देश की शहादत पर कई भावनात्मक कविताओं का पाठ किया गया। इस आयोजन में देश-प्रदेश के प्रमुख कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रप्रेम और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया।
कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में अजय चंद्राकर ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “हमारी संस्कृति के जितने घटक होते हैं, भौतिक प्रगति सदैव चलती रहती है। यह आवश्यक है कि हम अपनी संस्कृति को संजोकर रखें, क्योंकि यह हमारी पहचान है।” उन्होंने आगे कहा, “भारत की संस्कृति के लिए हम विख्यात हैं। एक दशक से तमाम कठिनाइयों के बावजूद, हमारा देश संस्कृति से भरपूर है, और यह निरंतर बढ़ रहा है।”
पद्मश्री सम्मानित कवि सुरेंद्र दुबे जी ने न केवल शहीदों के सम्मान में कविता प्रस्तुत की, बल्कि इस अवसर पर उन्होंने सभी कवियों का परिचय भी कराया और मंच पर हंसी-टिटौली, शृंगारी शेरों के साथ श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस गरिमामयी और आनंद रस से सराबोर आयोजन में हज़ारों की संख्या में दर्शकों ने खुब आनंद लिया। कवि सुरेंद्र दुबे जी का अनोखा और नये अंदाज़ अब तक के सबसे अच्छे कविता पठन में से एक था। उनकी लेखनी में गहरी सामाजिक सोच और कवि का दृष्टिकोण दर्शाया गया, जिसने इस कवि सम्मेलन को एक नई दिशा दी। सुरेंद्र दुबे जी का मंच पर उपस्थित होना इस आयोजन की गरिमा को और भी बढ़ाता है।
प्रख्यात कवि मिश्रा जी (लखनऊ से) ने इस कवि सम्मेलन में अपनी कविता के माध्यम से वीर जवानों की शहादत, राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि की रक्षा के प्रति हमारी जिम्मेदारी को गहराई से व्यक्त किया। उन्होंने अपनी कविता में कहा, “होली, दिवाली और सरहद पर जवान अपनी जान की बाजी लगाता है, तो हमें उसकी शहादत को कभी नहीं भूलना चाहिए।” इसके अलावा, मिश्रा जी ने किसानों और मजदूरों के संघर्ष को भी अपनी कविता में प्रभावी तरीके से उजागर किया। उन्होंने कहा, “मेरे देश के किसान-मज़दूर का बेटा क्या होता है, वह रणभूमि की लाज बचाता है।” कविता में उन्होंने यह भी कहा, “बोटी बोटी कट जाऊं, इंच बट जाऊं, तिरंगा लपेट के आऊंगा या बॉर्डर पर तिरंगा लहराऊंगा,” जिससे शहीदों की वीरता और उनके बलिदान की भावना को प्रकट किया।
सुदीप भोला ने दिल्ली से अपनी कविताओं के माध्यम से कृषि संकट और किसानों की बदहाली का चित्रण किया। उनकी कविता “जो देता है खुशहाली, जिसके दम से हरियाली, आज वही बर्बाद खड़ा है, देखो उसकी बदहाली” ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा, सुदीप भोला ने एक और कविता “एक बेटी की कहानी” प्रस्तुत की, जो एक लड़की के संघर्ष और उसके सपनों की कहानी थी। इस कविता में उन्होंने समाज के गंभीर मुद्दों को उजागर किया और यह संदेश दिया कि हर लड़की को अपनी पहचान बनाने का पूरा अधिकार है।
सुदीप भोला की कविता – एक बेटी की कहानी
पापा ने पीपल डे पर मोबाइल दिलवाया था,
ऑनलाइन होगी पढ़ाई, किस्तों पर से मंगवाया था,
पढ़ो बेटियां, पढ़ो बेटियां।
थोड़ी सी नादानी में ट्विस्ट आया कहानी में,
जो पापा का सपना था, पहले जैसी अब न थी।
शहर के पास मिली या बड़ी नाला के पास मिली वो पापा की परी मिली, सूटकेश में भरी मिली।
फिर वो लड़की टैटू से पहचानी थी,
दुनिया वाले सोच रहे हैं, वो लड़की रिल बनाती थी।
सामाजिक मुद्दों पर सशक्त विचार
यह कवि सम्मेलन केवल साहित्यिक प्रस्तुति का अवसर नहीं था, बल्कि यह समाज के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी और सशक्त चर्चा का मंच भी बना। सुदीप भोला ने एक लड़की की कहानी के माध्यम से शिक्षा के महत्व को दर्शाया, और कविता में यह जिक्र किया कि एक लड़की, जिसका सपना था पढ़ाई करना, कुछ ट्विस्ट के बाद समाज के गंभीर मुद्दों का सामना करती है, जो समाज में बदलाव की आवश्यकता को उजागर करता है।
सुरेंद्र दुबे जी का विशेष योगदान
इस आयोजन में पद्मश्री सम्मानित कवि सुरेंद्र दुबे जी ने अपनी कविता में शहीदों की शहादत को याद किया और नक्सली हमले में शहीद हुए विनोद चौबे की शहादत पर विशेष ध्यान आकर्षित किया। उनकी कविता “क्या होली क्या दिवाली, पस्त पस्त है पुलिस की नौकरी में, पूरा परिवार त्रस्त है” ने पुलिसकर्मियों की कठिनाइयों और उनके परिवारों की त्रासदी को उजागर किया। सुरेंद्र दुबे जी ने अपनी रचना में शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे ईमानदार पुलिस बहुत पसंद आती है, तभी विनोद चौबे की शहादत के आगे मैं सिर झुका देता हूं।”
यह कवि सम्मेलन पिछले 20 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा है और यह न केवल साहित्य प्रेमियों को एक साथ लाता है, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी चर्चा का अवसर भी प्रदान करता है। यह कवि सम्मेलन न केवल साहित्य की धारा को आगे बढ़ाता है, बल्कि समाज की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए राष्ट्रप्रेम और एकता की भावना को भी मजबूत करता है।
इस अवसर पर कुरुद नगर के प्रथम नागरिक ज्योति चंद्राकर, , कुरुद जनपद पंचायत अध्यक्ष गीतेश्वरी साहू, मगरलोड जनपद पंचायत अध्यक्ष. वीरेंद्र साहू भानु चंद्राकर अध्यक्ष संस्था वंदेमातरम परिवार समिति, होरीलाल साहु, मालकराम साहु, कृष्णकांत साहु, मोहन अग्रवाल,, लोकेश्वर सिन्हा भूपेंद्र चंद्राकर किशोर यादव सोम सिन्हा केशव चंद्राकर कमल शर्मा सविता गंजीर प्रभात बैस सहित अन्य गणमान्य अतिथियों और हज़ारों श्रोताओं ने इस कवि सम्मेलन में भाग लिया और आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। इन सभी ने अपने योगदान से इस साहित्यिक कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
