मास्टर रिधान जैन ने 5 वर्ष की आयु में भक्तामर स्तोत्र का पाठ कर बनाया विश्व रिकॉर्ड
महावीर जयंती कार्यक्रम रायपुर के बाद धमतरी में देंगे प्रस्तुति

धमतरी-मास्टर रिधान जैन ने 5 वर्ष 10 माह की अल्पायु में आचार्य भगवन्त मानतुंग स्वामी की ऋषभदेव भक्ति वन्दना, संस्कृत उच्चारण में लिपि बद्ध ,भक्तामर स्तोत्र पाठ का वाचन कर विश्व कीर्तिमान बनाया।महावीर जयंती कार्यक्रम रायपुर के बाद धमतरी में प्रस्तुति देंगे.मास्टर रिधान जैन का अभ्युदय जयपुर निवासी आई डी एफ सी बैंक में ओडिशा के क्षेत्रीय प्रमुख के रूप में कार्यरत लोकेंद्र जैन और शिक्षा विद् श्रीमती सोनिका जैन के घर में 20 अप्रैल 2019 को हुआ.अपनी विलक्षण स्मरण शक्ति और गहरी श्रद्धा से श्रीमती कान्ता देवी अजमेरा के सानिध्य और मार्गदर्शन में निष्ठा, सम्मान और लगन से भक्तामर स्तोत्र के सम्पूर्ण 48 श्लोकों का शुद्ध उच्चारण करते हुए 18 मिनट और 32 पलों में पाठ का वाचन पूरा कर किर्तिमान स्थापित किया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है।मास्टर रिधान ने बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र खंडगिरि, उदयगिरि भुवनेश्वर, ओडिशा में सैकड़ों श्रद्धालुओं के समक्ष इस उपलब्धि को प्राप्त किया।
भक्तामर स्तोत्र: जैन संस्कृति का अमूल्य ग्रंथ
भक्तामर स्तोत्र, जिसे आचार्य मानतुंग स्वामी ने आदि तीर्थंकर ,आदि ब्रह्मा ऋषभदेव की स्तुति में रचा था, यह अनुपम स्तोत्र संस्कृत उच्चारण में बसन्त तिलका छन्द में लिखा गया है। इसकी अद्भुत शक्ति से साधक को आध्यात्मिक और मानसिक शांति मिलती है। इसका नियमित पाठ करने से स्वास्थ्य, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.रमेश गंगवाल ने बताया कि मास्टर रिधान जैन की इस उपलब्धि से अभिभूत उसके माता पिता ने यह संदेश दिया कि हम चाहते हैं कि जैन संस्कृति और धार्मिक मूल्यों की ज्योति हर युवा तक पहुंचे और वे बचपन से ही धर्म और संस्कृति से जुड़ें।मास्टर रिधान की इस अद्भुत उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि जैन धर्म और संस्कृति की विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। इस उपलब्धि ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे जैन समाज को गौरवान्वित किया है।सभी जैन मतावलंबियों ने उनकी विलक्षण प्रतिभा की सराहना करते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की है।



