चालीहा महोत्सव के 13 वें दिन चालीसा पाठ का आयोजन, श्री प्रेम प्रकाश आश्रम में हुआ भजन कीर्तन

आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज के विगत 21 मई से जारी चालीहा महोत्सव के 13 वें दिन के चालीसा पाठ का आयोजन श्री प्रेम प्रकाश आश्रम परिसर पर रात्रि 9.30 बजे से 10.30 बजे तक किया गया.जिसमें अनेक भक्तों द्वारा आचार्यश्री के महिमामय भजन बड़े ही भावपूर्ण ढंग से गाकर उपस्थित जन समुदाय को भाव विभोर कर दिया श्री प्रेम प्रकाश मण्डल के वर्तमान अध्यक्ष गुरुदेव सद्गुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज ने आचार्य श्री के चालीहा महोत्सव के 13 वें दिन विश्व के सभी गुरुभक्तों हेतु सन्देश जारी कर सद्गुरु स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज की गुरुनिष्ठा की पराकाष्ठा पर रोशनी डाली एवं बताया कि आचार्य प्रवर के गुरु थे पूज्य साईं आसूरामजी महाराज, जिनके लिए आचार्य जी के मन में सदैव यह भावना रही के मेरे गुरुदेव पूर्ण ब्रह्म हैं वे विष्णु शिव गणपति आदि देवतागण से भिन्न नहीं हैं. उन्हें ही पूर्ण विश्वास के साथ अपना आराध्य माना एवं सदैव उनकी ही पूजा की,अपने मन में इस बात की गांठ बांध कर कि गुरुदेव के बिना मेरा और कोई देवता नहीं उन्हें ही अपने अंतर्मन में सदैव के लिए बसा लिया.आचार्यश्री की गुरुनिष्ठा को देख कर गुरदेव आसूराम जी महाराज ने आचार्यश्री की परीक्षा लेने की सोची एक बार सत्संग का दरबार सजा हुआ था सत्संग सभा कई शिष्यों एवं गुरुभक्तों से भरी हुई थी गुरुदेव ने स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज से कहा कि मुझे कहीं जाना है मेरी पादुका मंगा दो तो आचार्यश्री स्वयं सत्संग सभा से उठे और बाहर से अपने गुरुवर की चरण पादुकाओं को अपने सिर पर धारण करके लाए एवं अपने गुरुदेव को अपने हाथों से चरण पादुकाएं पहनाईं.इस बात पर गुरुदेव आसूराम जी महाराज आचार्यश्री पर इतने प्रसन्न हुए कि उनके मुख से यह आशीर्वाद निकली कि मेरे प्यारे ! आज आपने मेरा दिल जीत लिया आप चाहते तो यहां इतने सेवादारी बैठे हैं इस छोटे से काम के लिए किसी भी सेवादार को बोलकर मेरी पादुकाएं मंगा सकते थे लेकिन आपने ऐसा नहीं कर स्वयं पादुकाओं को सिर पर धारण कर लाकर अपने हाथों से पहनाईं हैं आज आपकी गुरु के प्रति इस निष्ठा की पराकाष्ठा हो गई, संसार देखेगा मुझसे भी ज्यादा आपकी कीर्ति संसार में होगी एवं आपकी महिमा युगों युगों तक गाई जाएगी.


