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36 साल बाद खुली मां विंध्यवासिनी मंदिर की बावली, विधि-विधान से मंत्रोच्चार कर पवित्र जल से किया गया बावली की पुनर्जीवित

आज जेष्ठ शुल्क दशमी को है मां गंगा का अवतरण दिवस इसलिए इस अवसर पर हुआ उक्त शुभ आयोजन

महापौर रामू रोहरा, सभापति कौशिल्या देवांगन, अशोक पवार, आनंद पवार सहित बड़ी संख्या में भक्त रहे उपस्थित
भक्तों ने घर से पवित्र जल लाकर किया बावली में प्रवाहित

धमतरी। नगर की आराध्य देवी मां विंध्यवासिनी मंदिर में स्थित पौराणिक बावली जो कि सालों से बंद था उसे आज पुन: खोलकर प्राण प्रतिष्ठा किया गया।  बता दे कि आज जेष्ठ शुक्ल दशमी तिथि पर गंगा दशहरा मां गंगा का अवतरण दिवस है। इस शुभ अवसर पर लगभग 36 वर्षो बाद मां विंध्यवासिनी मंदिर की बावली को पुन: खोला गया है। आज सुबह 11 बजे मंदिर में विधि-विधान से पूजा अर्चना कर मंत्रोच्चार से बावली को पुनर्जीवित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मां विंध्यवासिनी के भक्त मौजूद रहे। जिसमें प्रमुख रुप से महापौर रामू रोहरा, सभापति कौशिल्या देवांगन, अशोक पवार, आनंद पवार, राजेन्द्र लुकंड़, महेन्द्र खण्डेलवाल, अनिता अग्रवाल, दीपक लखोटिया, माधव राव पवार, सतीश पवार, मदनमोहन खण्डेलवाल, सूर्या राव पवार, प्रदीप रणसिंह, ऋतुराज पवार, दीपक राय उपस्थित रहे।  उल्लेखनीय है कि आज सुबह 11 बजे से बावली पुनर्जीवित करने के पश्चात भक्तों द्वारा लाये गये पवित्र जल को बावली में प्रवाहित किया गया। बता दे कि लगभग डेढ करोड़ की लागत से मां विंध्यवासिनी मंदिर का सौन्दर्यीकरण किया जा रहा है। जो कि अंतिम दौर में है। 36 वर्षो बाद बावली जो कि मल्बे से पटी हुई थी जिसे खुदाई कर साफ किया गया। खुदाई के पश्चात बावली की सीढ़ी सुरक्षित मिली। ऐसा माना जाता है कि मां विंध्यवासिनी इसी बावली में स्नान करती है। इस जल को चरणामृत मानकर भक्तों को प्रसाद के रुप में बाटा जाएगा।

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