जिला अस्पताल में रोजाना उमड़ रही मरीजों की भीड़, लेकिन खल रही डाक्टरों की कमी
धमतरी सहित आसपास के कई जिलों व बस्तर तक के मरीज पहुंचते है जिला अस्पताल
चिकित्साधिकारी सहित विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी से बेहतर उपचार सुविधा हो रही प्रभावित

धमतरी। जिला अस्पताल धमतरी में रोजाना सैकड़ो मरीजों की ओपीडी होती है धमतरी सहित अन्य कई जिलों के मरीज बेहतर उपचार की उम्मीद में अस्पताल पहुंचते है लेकिन डाक्टरों की कमी के चलते मरीजों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है।
बता दे कि जिला अस्पताल में धमतरी जिले के अतिरिक्त बालोद, दुर्ग, कांकेर, व बस्तर तक के मरीज उपचार हेतु पहुंचते है। अस्पताल की ओपीडी रोजाना 500 से अधिक होती है। लेकिन डाक्टरों की कमी से बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मिल रही जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में सर्जिकल विशेषज्ञ के 2 स्त्री रोग विशेषज्ञ के 1, निश्चेतना विशेषज्ञ के 1, पैथलॉजिस्ट के 2, नाक काम गला रोग विशेषज्ञ के 2 पद रिक्त है। इसके अतिरिक्त 3 चिकित्साधिकारियों के पद रिक्त है। वहीं अस्पताल के सीनियर डाक्टर संजय वानखेड़े (एमडी मेडीसीन) भी रिटायर होने वाले है ऐसे में स्वास्थ्य सुविधा और भी ज्यादा प्रभावित हो सकता है।
मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री के साथ ही विस में उठा मुद्दा फिर भी दूर नहीं हुई समस्या
ज्ञात हो कि जिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी को दूर करने नागरिकों, नेताओं, संस्थाओं द्वारा भी मांग की जा चुकी है। उक्त समस्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के समक्ष भी रखी गई है। हर बार आश्वासन ही मिला विधायक ओंकार साहू ने डाक्टरों की कमी का मुद्दा विधानसभा में भी उठाया है। लेकिन विडम्बना है कि अब तक डाक्टरों की कमी दूर नहीं हो पाई। उल्टे डाक्टरों के इस्तीफे के कारण डाक्टरों की संख्या जिला अस्पताल में घटती जा रही है।
रिफर सेंटर बन रहा जिला अस्पताल, सोनोग्राफी में भी वेटिंग पड़ रहा भारी
जिला अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार पिछले कुछ सालों में हुआ है लेकिन डाक्टरों की कमी सुविधाओं पर भारी पड़ रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या और डाक्टरों की कमी के कारण जिला अस्पताल पिछले कुछ समय से रिफर सेंटर बन रहा है। विशेषकर गर्भवती मरीजों और गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीजों को रिफर करना आम बात हो चुकी है। जिला अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा गरीब व मध्यम तबके के लोगों के लिए राहत है, लेकिन अव्यवस्था राहत को मुसीबत बना रही है। यहां मरीजों की संख्या ज्यादा होने से मरीजों की वेटिंग रहती है। इससे ईलाज भी प्रभावित होता है।

