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चातुर्मास के दौरान तप, जप, आराधना, साधना के माध्यम से जुडऩे का प्रयास करना है – परम पूज्य प्रशम सागर जी म.सा.

6 जुलाई से प्रारंभ होगा चातुर्मासिक प्रवचन


धमतरी। परम पूज्य उपाध्याय प्रवर अध्यात्म योगी महेंद्र सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवामनीषी मनीष सागर जी महाराज साहेब के सुशिष्य परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य योगवर्धन जी महाराज साहेब चातुर्मास हेतु श्री पाश्र्वनाथ जिनालय धमतरी में विराजमान है।
परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब ने फरमाया कि चातुर्मास 9 जुलाई से प्रारंभ होने वाला है। जैसे हम कोई भी पर्व आने से पहले ही उसकी तैयारी प्रारंभ कर देते है वैसे ही चातुर्मास आने से पहले ही हमे स्वयं को तैयार कर लेना है। तप, जप, आराधना, साधना के माध्यम से जुडऩे का प्रयास करना है। चातुर्मास काल में साधु साध्वी चार माह तक एक स्थान में रहते है। इस अवसर का लाभ उठाकर श्रावक श्राविकाओं को जिनवाणी श्रवण कर आत्म उत्थान की ओर आगे बढऩे का प्रयास करना है। चातुर्मास काल में गुरुभगवंतो के मुख से हमें जिनवाणी श्रवण करना है। इस जिनवाणी रूपी ज्ञान को आचरण में लाने का क्रम इस प्रकार है। सुनना – गुरुभगवंतो से जिनवाणी को श्रवण करना, समझना – सुने हुए वचनों का बारंबार चिंतन कर उसके अर्थ को समझना, स्वीकारना – जिनवाणी को समझने के बाद उस पर सम्यक श्रद्धा कर हृदय में धारण करना, सुधरना – जिनवचनों का आलंबन लेकर अपने दैनिक जीवन में आचरण को सुधारना, चातुर्मास काल के दौरान श्रावक श्राविकाओं को पांच कार्य जरूर करना चाहिए सेवा – ज्ञानीभगवंत कहते है सुख देने से सुख अर्थात शाता मिलती है। अत: हमें सेवा भाव से दूसरों को सुख अर्थात शाता पहुंचाने का कार्य करना चाहिए, तप, ज्ञान, ध्यान, भक्ति करना चाहिए। ज्ञात हो कि चातुर्मासिक प्रवचन 6 जुलाई से प्रारंभ होगा।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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