कषाय पहले मस्त, व्यस्त फिर पस्त और अंत में जीवन का अस्त करता है – परम पूज्य प्रशम सागर जी म.सा.

धमतरी। परम पूज्य उपाध्याय प्रवर अध्यात्मयोगी महेंद्र सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवामनीषी स्वाध्याय प्रेमी मनीष सागर जी महाराज साहेब के सुशिष्य परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य योगवर्धन जी महाराज साहेब श्री पाश्र्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार धमतरी में विराजमान है। आज परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब ने प्रवचन के माध्यम से फरमाया कि परमात्मा कहते है हम संसार में अपनी एक इच्छा को पूरी करने के लिए न जाने कितनी इच्छाओं को जन्म देते है। कषाय हमे हमेशा व्यस्त रखता है। और हम इस कषाय के चक्कर में आराधना साधना नहीं कर पाते। ये कषाय हमे पहले मस्त करता है फिर व्यस्त करता है। उसके बाद पस्त करता है और अंत में हमारे जीवन का अस्त कर देता है। मान कषाय अपनी इच्छा से बिना कुछ आधार के मान लेना। मान कषाय को छोडऩा बहुत कठिन है। हम शरीर को तो झुका लेते है लेकिन मन नहीं झुक पाता। यही मान कषाय है। मान कषाय के कारण हमे सम्मान और अपमान दोनों मिल सकता है। जीवन में परिग्रह की वृद्धि का एक कारण मान कषाय है। मान कषाय जीवन में पाप को बढ़ाता है। हमारे जीवन में मान कषाय है ऐसा हम कभी मानते ही नहीं। इस बात को न मानना भी एक पाप है। जिस दिन जीवन से मान कषाय का मान निकल जाएगा उस दिन हम भी पाप को छोड़ पाएंगे। मान कषाय ही हमे संसार में पाप कराता है। और यहां पाप करके हम खुश होते है। अंतत: यह कषाय दुख का ही कारण बनता है।
तपस्या की श्रृंखला जारी
मयंक पारख सुपुत्र मनीष पारख के आज 29 उपवास है। अक्षित डागा सुपुत्र मनोज डागा के आज 09 उपवास है। संघ में अक्षयनिधि तप, समवशरण तप, विजयकषाय तप, स्वस्तिक तप जारी है।