लोकतांत्रिक मूल्यों से खिलवाड़ कर रही कांग्रेस- रविकांत चन्द्राकर

कुरुद। भाजपा ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास पर करारा हमला बोलते हुए उसे विवादों की फैक्ट्री करार दिया है। जिला भाजपा उपाध्यक्ष रविकांत चंद्राकर ने दावा किया कि कांग्रेस न केवल आज बल्कि अपने आरंभिक दौर से ही लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ करती आई है। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि 1952 के पहले आम चुनाव में कांग्रेस ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ ऐसा अन्याय किया, जो भारतीय लोकतंत्र के माथे पर आज भी एक काला धब्बा है। श्री चंद्राकर के मुताबिक, मुंबई उत्तर लोकसभा सीट पर डॉ. आंबेडकर की हार-जीत का अंतर मात्र 14, 561 वोट का था, जबकि कांग्रेस के दबाव में चुनाव आयोग ने 74, 333 वोट खारिज कर दिए। इतना ही नहीं कांग्रेस ने आंबेडकर के खिलाफ उनके पूर्व सहयोगी नारायण सादोबा काजरोलकर को उम्मीदवार बनाया और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी खुलेआम कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार किया। डॉ. आंबेडकर ने इस अन्याय के खिलाफ 21 अप्रैल 1952 को केंद्रीय चुनाव आयोग में 18 पृष्ठों की याचिका दाखिल की, जो भारत की पहली चुनावी याचिका मानी जाती है। भाजपा नेता ने कहा कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं थी। कांग्रेस का सत्ता-लालच 1946 में भी सामने आया था, जब पार्टी के 15 में से 12 प्रांतीय कांग्रेस कमेटियों ने सरदार वल्लभभाई पटेल को अध्यक्ष पद के लिए चुना था। उस समय पटेल के पक्ष में पूरे संगठन का भारी समर्थन था, लेकिन महात्मा गांधी की इच्छा और कांग्रेस के आंतरिक समीकरणों के चलते जवाहरलाल नेहरू को अध्यक्ष बनाया गया, जिससे उनके पहले प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया।


