आज पंजीयन की अंतिम तिथि : आनलाईन पंजीयन में किसानों को आई कई दिक्कते
15 नवम्बर से शुरु होगी धान खरीदी, किसानो को पंजीयन हेतु लगाने पड़े लोकसेवा केन्द्रो के कई चक्कर
अब भी कई किसान है आनलाईन पंजीयन से वंचित, हो रही तिथि बढ़ाने व पोर्टल में सुधार की मांग

धमतरी। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी इस बार 15 नवम्बर से शुरु होगी। जिसकी तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर जोर शोर से जारी है। धान खरीदी के पूर्व आनलाईन पोर्टल पर किसानों को पंयीजन कराना अनिवार्य होता है। जिसकी अंतिम तिथि आज 31 अक्टूबर को है। लेकिन पंजीयन प्रक्रिया व पोर्टल में विसंगतियों से किसान पंजीयन हेतु परेशान हो रहे है। उन्हें अब पंजीयन में आ रही दिक्कतों के कारण समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित होने का भी डर सता रहा है।
राज्य सरकार द्वारा एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन को अनिवार्य किया गया है, लेकिन किसानों की माने तो उक्त पोर्टल में कई विसंगतियां है। पोर्टल पूर्णत: अपडेट भी नहीं है। जिसके चलते किसानों को पंजीयन के लिए परेशान होना पड़ रहा है। मिल रही जानकारी के अनुसार आज अंतिम तिथि की स्थिति में भी जिले के हजारों किसान धान रकबे का पंजीयन कराने से वंचित रहे हैं। बीते कई दिनो से एग्रीस्टेक पोर्टल में अपना पंजीयन कराने भटक रहे किसानो के पास मात्र आज का समय ही था।
किसानों ने चर्चा के दौरान कहा कि एग्रीस्टेक पोर्टल की अनिवार्यता लागू कर किसानो के रकबे को कम किया जा रहा है। सभी रकबों का पंजीयन नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा जो किसान सरकारी जमीन लीज में लेकर खेती कर रहे हैं उन्हें भी एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन कराने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। पंजीयन को लेकर सबसे ज्यादा परेशानी नए रकबे की खरीदी, रकबा बंटवारा सहित अन्य रकबे वाले किसानो को उठानी पड़ रही है। स्थिति ये है कि पंजीयन से वंचित हजारो किसान सेवा सहकारी समिति, लोक सेवा केन्द्र अथवा राजस्व विभाग के पटवारी से लेकिन संबंधित विभागों के अधिकारियों के चक्कर काटने मजबूर है लेकिन इसके बावजूद इसके उनका पंजीयन नहीं हो पा रहा है। किसानों ने बताया कि किसी किसान के पास अभी एक अधिक भूमि है तो सभी के लिए अलग-अलग पंजीयन कराना पड़ा, पंजीयन अप्रूअल मे लंबा समय लगा। जैसे कई दिक्कते आई। किसानों ने शासन प्रशासन ने पंजीयन की व्यवस्था को शिथिल करने के साथ एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन की तिथि बढ़ाए जाने की मांग की है।
रही कई प्रकार की तकनीकि समस्याएं
किसानो को पंजीयन के दौरान एग्रीस्टैक पोर्टल में कई प्रकार की तकनीकि समस्याएं जैसे वेबसाइट का धीमा चलना, सर्वर डाउन होना या तकनीकी दिक्कतों के कारण पंजीयन प्रक्रिया में समय ज्यादा लगना, भूमि अभिलेख (बी-1, खसरा, खतौनी) के डेटा और पोर्टल के डेटा में अंतर होना। कई बार रकबे में कटौती की समस्या भी आती रही। बिचौलियों को रोकने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया गया है, जिसे कृषि कार्यों के बीच पूरा करना कई किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है। कुछ मामलों में संयुक्त परिवारों या प्रवासी सदस्यों के लिए भूमि के कानूनी वारिसों के बायोमेट्रिक और ओटीपी प्रमाणीकरण जैसे कठोर और जटिल मानदंडों के कारण परेशानी हुई। कुछ गांवों में सोसायटियों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों का कोड अलग होने के कारण पंजीयन नहीं हो पा रहा है। वन भूमि पर खेती करने वाले किसानों के पंजीयन में विशेष दिक्कतें आ रही हैं।
