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मर्यादा की सीमा रेखा लांघना,ही है सर्वनाश-पं.राजेश शर्मा

धर्म प्रेमी समाजसेवी पंडित श्री शर्मा ने सेनचुवा के मानस मंच के निरंतरता हेतु शुभकामनाएं दी

रामायण की चौपाइयों का मंत्रोच्चारण करने से जीवन बनता है खुशहाल-: राजेंद्र शर्मा

धमतरी। मानस पर शोध करते हुए डॉक्टरेट (पी एच डी)की उपाधि हासिल करते हुए अपने दैनिक दिनचर्या में रामचरितमानस की चौपाइयों को समाहित कर इसे जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाने वाले राज मानस संघ के प्रमुख सदस्य डॉक्टर भूषण चंद्राकर द्वारा एक लंबे समय से अपने समिति के साथियों के साथ स्वयं मानव समिति के माध्यम से भगवान राम के जीवन चरित्र का प्रचार तो करते ही हैं उसके साथ ही वे आयोजन का माध्यम गांव में बनते हुए अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं आयोजन की निरंतरता को इस वर्ष भी आगे बढ़ते हुए गांव के प्रमुख चौक पर आयोजित मानस मंच पर धर्म प्रेमी समाज सेवी पंडित राजेश शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर सफल आयोजन के लिए सबको बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उपस्थित जनों को संबोधित कर कहा कि जीवन में जो व्यक्ति मर्यादाओं की सीमा में रहकर समाज में संतुलित व्यवहार करता है वह जीवन के समग्र क्षेत्र में चरम उत्कर्ष को ओर प्राप्त करता है और जो इस सीमा रेखा को लांघ देता है वह सर्वनाश एवं पतन की ओर अग्रसर होता है इसका जीता जागता है उदाहरण रामायण में रावण के साथ-साथ अन्य महारथियों का युद्ध की विभीषिका में समा जाना दर्शाता है इसलिए रामायण के प्रत्येक चौपाई को साक्षात एवं शाश्वत मंत्र के रूप में अपने दिनचर्या में शामिल करें तो जीवन खुशहाल हो जाएगा। वहीं नगर निगम के पूर्व सभापति राजेंद्र शर्मा ने कहा कि जीवन को नैतिक मूल्यों पर आधारित करते हुए उसे यदि खुशहाल बनाना है तो रामायण के प्रसंग को प्रभु राम के जीवन चरित्र के माध्यम से अनुसरण करते हुए जिए तो निश्चित ही हमें सुख, शांति एवं खुशहाली की प्राप्ति होगी। उक्त अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित जनों में गांव के वरिष्ठ नागरिक दाऊ दयालाल चंद्राकर, डाही सहकारी समिति के अध्यक्ष साकेत साहू, महेंद्र तारक, बलराम साहू,अनिरुद्ध चंद्राकर, गोविंद तारक, नारायण खुटेर, राजेश कुमार सेन, कमलेश चंद्राकर, भूपेंद्र चंद्राकर,राधेश्याम साहू सहित अनेक लोगों उपस्थित थे। सीताराम मानस समिति द्वारा आयोजित इस आयोजन में कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध मंच संचालक डॉ.जे.एल. देवांगन द्वारा किया गया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. भूषण चंद्राकर द्वारा किया गया।

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