सहकारिता ग्रामीण विकास की धुरी है : डॉ दीक्षित

धमतरी- राष्ट्र निर्माण में सहकारिता आंदोलन द्वारा हासिल किए गए उपलब्धियो को उजागर करने के साथ ही भविष्य में आने वाली सहकारी क्षेत्र के सामने चुनौतियो व बाधाओं को दूर करने हेतु जिला सहकारी संघ धमतरी द्वारा 72वाँ अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह के तृतीय दिवस 16 नवम्बर के कार्यक्रम का विषय सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण विकास को गति देना पर एक संगोष्ठी का आयोजन नगरी विकासखंड के वनांचल क्षेत्र के प्राथमिक वनोंपज सहकारी समिति जबर्रा के ग्राम पंचायत भवन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्रीमती कौशल्या मरकाम सरपंच ग्राम पंचायत जबर्रा, प्राथमिक वनोंपज सहकारी समिति जबर्रा के अध्यक्ष हेमलाल ध्रुव, वन प्रबंधन समिति जबर्रा के अध्यक्ष माधव सिंह मरकाम, जैव विविधता समिति जबर्रा के अध्यक्ष रामकुमार यादव, डिप्टी रेंजर दुगली सिल्वर कुमार सोंम, वनरक्षक परिक्षेत्र दुगली श्याम सिंह दुग्गा, वरिष्ठ नागरिक कृषक अनिरुद्ध नेताम, प्रवक्ता डॉक्टर ए एन दीक्षित एवं संघ प्रबंधक ए पी गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति में दीप प्रज्वलन व भारत माता के चित्र पर पूजन अर्चन पश्चात अतिथियों के स्वागत उपरांत किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य प्रवक्ता डॉक्टर दीक्षित ने कहा कि यदि हमें 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना है, तो हमें तत्काल भारत के सहकारिता क्षेत्र को सशक्त एवं जीवंत बनाने हेतु कार्य करना होगा। आज भी भारत एक ग्रामीण जनसंख्या बाहुल्य वाला क्षेत्र है, जहां के लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन कृषि है। भारतीय कृषि और संबंधित क्षेत्र जैसे डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, वनोपज संग्रहण तथा ग्रामीण उद्योग मुख्यतः सहकारिता पर निर्भर है तथा सहकारिता के उत्थान से ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था के इन अंगों का विकास संभव है। सहकारिता एक संतुलनकारी नीति है। एक ओर तो यह व्यवसायिक संगठन है जिसे बड़े व्यावसायिक निगमो से प्रतिस्पर्धा करना है, तो दूसरी ओर उसे अपने छोटे एवं निर्धन सदस्यों के हितों का भी ध्यान रखना होता है। यही दर्शन सहकारिता को अन्य व्यवसायिक संगठन से अलग खड़ा करता है। बाजार में बने रहने एवं प्रतिस्पर्धा करने हेतु व्यावसायिक कौशल एवं कुशल प्रबंधन आवश्यक है, परंतु अपनी अंतर्निहित विशेषताओं के कारण सहकारी संस्थाएं प्रायः प्रबंधन की अकुशलता एवं राजनीतिक हस्तक्षेप से ग्रस्त बनी रहती है।नई सहकारी नीति के अंतर्गत सहकारिता को तदर्थवाद से हटा कर एक व्यवस्थित नीति के अंतर्गत पोषित किया जा रहा है। उन्हें खरीद, प्रसंस्करण, भंडारण में बड़े पैमाने की बचते प्राप्त करने हेतु तैयार किया जा रहा है। डिजिटलीकरण को अपनाकर समितियो में परिचालन दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रत्येक पंचायत को सहकारी समिति के दायरे में लाने हेतु देश में दो लाख नई सहकारी समितियां गठित करने का निर्णय लिया गया है। महिला नेतृत्व वाली समितियो को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा हैं। कार्यक्रम को मंचस्थ अतिथियों ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति तुमडीबहार के प्रबंधक रोहित नाग, जबर्रा प्रबंधक सुखराम नेताम, बोराई प्रबंधक सुरेंद्र नेताम, अमाली प्रबंधक युवराज पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं महिलाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संघ प्रबंधक ए पी गुप्ता एवं आभार प्रदर्शन जबर्रा प्रबंधक सुखराम नेताम ने किया।

