आमापारा में नौ दिवसीय भागवत कथा का हवन-पूजन के साथ समापन
जो व्यक्ति शरीर इंद्रिय, मन, बुद्घि भगवान को अर्पण कर दें, वही भगवान को प्रिय : पलक दुबे

धमतरी। आमापारा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के समापन पर तुलसी वर्षा, गीता पाठ, हवन, सहस्त्रधारा की कथा सुनाई गई। इसके बाद भंडारे का आयोजन हुआ। अंतिम दिन मंगलवार को कथा वाचिका पलक दुबे ने बताया कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ा है, तब-तब भगवान ने अवतार लेकर दुष्टों का संहार कर धर्म की स्थापना की। उन्होंने बताया कि द्वापर युग में कंस का अत्याचार बढऩे पर भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया और सत्य की विजय का संदेश दिया। उन्होंने आगे भागवत भगवान के महत्व को बताते हुए कहा कि भागवत का सार तत्व है भक्ति, ज्ञान ,वैराग्य और तपस्या जो कभी भी खत्म नहीं होता है। श्रीकृष्ण से जितना प्रेम करोगे उतना ही प्रेम का रंग चढ़ता जाएगा। कथावाचिका पलक दुबे ने कहा कि सांसारिक मोह, माया के कारण मनुष्य अपने कर्तव्य से विमुख हो जाता है, लेकिन मनुष्य को कर्तव्य का पालन करना चाहिए। शरीर नाशवान है लेकिन आत्मा अमर है। निष्काम काम से भाव पूर्वक काम केवल दूसरों के लिए काम करना चाहिए, इससे मनुष्य का कल्याण होता है। गीता सार में बताया गया है नि:स्वार्थ भाव से मनुष्य को कर्म करना चाहिए। मनुष्य को अनुकूल परिस्थितियों में जीवन जीना चाहिए, क्योंकि सुख और दुख आते रहते हैं। सबके शरीर में भगवान का दर्शन करना चाहिए अर्थात सबमें भगवान है। कथा वाचिका पलक दुबे ने बताया कि मरने के समय मनुष्य जो भाव सुमरन करेगा, उसी भाव को प्राप्त करेगा। सभी मनुष्य भागवत प्राप्ति के अधिकारी हैं। संसार में जहां सुंदरता विलक्षणता दिखे, उसको भगवान का स्वरूप मानकर स्वीकार करना चाहिए। जगत को भगवान का स्वरूप मानना है। जो व्यक्ति शरीर इंद्रिय, मन,बुद्घि भगवान को अर्पण कर देता है, वही भगवान को प्रिय होता है। कथा सुनने के लिए श्रद्धालु अर्जुन नाग, प्रभा नाग, मनोज कुमार, गिरीश कुमार, रूपनारायण धीवर, शेष नारायण कोसरिया, ज्ञानेश्वर चन्द्रवंशी, जमुना बाई, केशव पटेल, धन्नु पटेल, मुन्ना पटेल, हेमंत नाग, राजकुमार धीवर, शैलेन्द्र नाग, युगल कुमार, सीमा नाग, पूजा नाग, गोमती नाग, रामबाई, अंजू तारक, अमित धीवर, शांता धीवर, रामदीन धीवर, भूपेन्द्र नाग, प्रफुल्ल नाग, पंकज धीवर, आशु यादव, मोनू यादव समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
