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लोकनिर्माण सभापति ने लगाया आरोप : एक फर्म विशेष को लाभ पहुंचाने ईई ने नियम विरुद्ध खोला टेंडर

जनप्रतिनिधि का कार्य शासकीय टेंडर हस्तक्षेप करना नहीं होता, फिर भी यदि नियम विरुद्ध टेंडर खोला गया होगा तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई - महापौर

निगम ईई ने कहा नियमानुसार ही खोला गया है टेंडर, किसी फर्म विशेष को लाभ पहुंचाने के आरोप है बेबुनियाद्

धमतरी। नगर निगम वर्तमान में अखाड़े में तब्दील होता दिखाई दे रहा है। एक टेंडर के मामले में सत्तापक्ष में ही मतभेद खुलकर सतह पर आ गया है। जिससे पार्टी में ही गुटबाजी भी नजर आ रही है। चर्चा है कि जिस फर्म को अपात्र घोषित किया गया है उसके द्वारा कोर्ट में इस मामले में केस दायर किया जा सकता है।
बता दे कि राज्य सरकार द्वारा निर्माणाधीन ऑडिटोरियम को कम्प्लीट करने 7 करोड़ स्वीकृत किया है। जिसके तहत ऑडिटोरियम को पूरा कराने निगम द्वारा टेंडर जारी किया गया था। पहली बार में सिर्फ एक टेंडर आया जिससे टेंडर नियमानुसार स्वयं ही रद्द हो गया। वहीं दूसरी बार पुन: टेंडर बुलाया गया। जिसमें भी मात्र 2 टेंडर आए। जिसमें एक को अपात्र, दूसरो को पात्र बताकर टेंडर खोला गया। इसके बाद ही विवाद बढऩे लगा है। इस संबंध में निगम लोक निर्माण विभाग के एमआईसी मेम्बर विजय मोटवानी का कहना है कि टेंडर नियम विरुद्ध एक फर्म विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए खोला गया है। नियमत: टेंडर में कमिशनर व डिप्टी कमिशनर के हस्ताक्षर आवश्यक होते है लेकिन उक्त टेंडर में दोनो के हस्ताक्षर नहीं है। धमतरी के जिस फर्म को अनुभव प्रमाण पत्र नहीं होने का हवाला देकर अपात्र माना गया है कि उसके पास अनुभव है। और जिस बिलासपुर के फर्म को पात्र मानकर टेंडर दिया गया है उसके पास ही पर्याप्त अनुभव नहीं है। चूंकि लोक निर्माण विभाग के एमआईसी सदस्य है इसलिए टेंडर प्रक्रिया के संबंध में उन्हें जानकारी दी जानी चाहिए। लेकिन उन्हें भरोसे में नहीं लिया गया। और जब उन्होने ईई महेन्द्र जगत से इस संबंध में जानकारी चाही तो उनके द्वारा उन्हें गुमराह करने का भी प्रयास किया गया। उक्त नियम विरुद्ध टेंडर खोले जाने का मामला महापौर के भी संज्ञान में है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इस संबंध में महापौर रामू रोहरा से चर्चा की गई तो उनका स्पष्ट कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। किसी भी जनप्रतिनिधि का कार्य शासकीय टेंडर हस्तक्षेप करना नहीं होता। फिर भी यदि नियम विरुद्ध टेंडर खोला गया होगा तो संज्ञान में लेकर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई होगी।
निगम ईई महेन्द्र जगत ने चर्चा के दौरान कहा कि दूसरे बार जब टेंडर बुलाया गया तो दो टेंडर आए जिसे शासन के पास मार्गदर्शन हेतु भेजा गया। शासन से मिले मार्गदर्शन व निर्देश के आधार पर ही फर्म को पात्र-अपात्र माना गया। रहीं बात कमिशनर या डिप्टी कमिशनर के बिना टेंडर खोलने की तो पूर्व में कमिशनर के समक्ष अनुमोदन हेतु भेजा गया था। और वैसे भी निगम ईई को टेंडर खोलने का अधिकार होता है और अधिकार के दायरे में ही रहकर टेंडर खोला गया है। आवश्यकता पड़ी तो कलेक्टर के समक्ष भी अनुमोदन हेतु फाईल भेज देंगे। उन्होने किसी फर्म विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए नियम विरुद्ध टेंडर खोलने के आरोप को नकारा है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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