अधिवक्ता पर हमला न्यायिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है -अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू
फरसाबहार में अधिवक्ता पर बोरा सीने वाले सूआ से हमला, आरोपी पर साधारण धाराएँ से अधिवक्ता समुदाय में गहरा आक्रोश

धमतरी -स्टेट बार काउंसिल ऑफ छत्तीसगढ़ के सदस्य अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जशपुर जिले के फरसाबहार में मंगलवार दोपहर एसडीएम कार्यालय परिसर में अधिवक्ता पर हुआ हमला न्यायिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है और इस घटना ने पूरे अधिवक्ता समाज को विचलित कर दिया है। प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने बताया कि पेशी पर आए युवक द्वारा अधिवक्ता चुन्नूराम चौहान पर बोरा सीने वाले नुकीले सूआ से अचानक हमला कर दिया गया। अधिवक्ता घायल हो गए और मौके पर मौजूद सहयोगियों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। साहू ने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार तपकरा निवासी आयुष चौधरी, किसी मामले में पेशी पर आया था। बहस के दौरान विवाद बढ़ने पर उसने टेबल पर रखे सूआ से सीधे अधिवक्ता के सिर और आंख पर वार कर दिया। सौभाग्य से प्रहार सीधा आंख में नहीं लगा, अन्यथा गंभीर दुर्घटना हो सकती थी.साहूअपने प्रेस बयान में साहू ने फरसाबहार पुलिस द्वारा आरोपी पर बी एन एस की साधारण धाराएँ 296, 115(2), 351(2) लगाए जाने पर गहरा आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह हमला हल्के अपराध की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह गंभीर और संभावित जानलेवा प्रकृति का है। उन्होंने स्पष्ट कहा यह केवल अधिवक्ता पर हमला नहीं, बल्कि पूरी न्यायिक प्रणाली पर हमला है। अधिवक्ता न्याय व्यवस्था की रीढ़ हैं। उन पर हुए हमले को साधारण धाराओं में दर्ज करना अस्वीकार्य है।
गृहमंत्री को पत्र भेजकर की त्वरित कार्रवाई की मांग
साहू ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि उन्होंने इस संबंध में राज्य के गृहमंत्री को ईमेल के माध्यम से विस्तृत पत्र भेजा है, जिसमें आरोपी पर कठोर धाराएँ लगाने, निष्पक्ष जांच कराने और जिला–स्तर पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोर्ट परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कमजोर है और सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे।छत्तीसगढ़ में अधिवक्ताओं पर हमलों की पुनरावृत्ति बढ़ती चिंता साहू ने याद दिलाया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। बिलासपुर में अधिवक्ता पर गंभीर हमला, रायपुर न्यायालय परिसर में अधिवक्ता से मारपीट सरगुजा में महिला अधिवक्ता के साथ अभद्रता व हमला जैसी घटनाएँ पहले भी घटित हो चुकी हैं, लेकिन अब तक अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए कोई सुदृढ़ नीति लागू नहीं की गई. साहू ने कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपी पर एटेम्पट टू मर्डर जैसी कड़ी धाराएँ नहीं लगाई गईं तथा पुलिस की भूमिका की जांच नहीं हुई, तो अधिवक्ता समाज आंदोलन करने को बाध्य होगा।अधिवक्ताओं की प्रमुख मांगें आरोपी पर कठोर धाराएँ जोड़ी जाएँ, पुलिस की लापरवाही की जांच की जाए
,न्यायालय परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए, अधिवक्ताओं की राज्यस्तरीय सुरक्षा नीति बनाई जाए


