ईश्वर की भक्ति का शुभारंभ है भरोसा- पं. अतुल कृष्ण
रामकथा के प्रथम दिवस श्रद्धा, विश्वास और अध्यात्म से सराबोर हुआ धमतरी, गाैशाला मैदान में नाै दिवसीय रामकथा का हुआ शुभारंभ

धमतरी। नगर में आयोजित पं. अतुल कृष्ण महाराज की रामकथा महोत्सव का शुभारंभ प्रथम दिवस अत्यंत श्रद्धामय वातावरण में हुआ। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, वहीं संध्या काल में जैसे ही व्यासपीठ से रामकथा का शुभारंभ हुआ, संपूर्ण परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। प्रथम दिवस की कथा में व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पं. अतुल कृष्ण महाराज ने भक्ति की गूढ़ व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि भक्ति का आरंभ विश्वास से होता है। जब मनुष्य अपने जीवन के समस्त सुख-दुख, भय और अपेक्षाओं को प्रभु के चरणों में पूर्ण समर्पण भाव से अर्पित कर देता है, तभी उसके जीवन का वास्तविक उद्देश्य पूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि केवल कर्म या ज्ञान नहीं, बल्कि अटूट भरोसा ही ईश्वर से जोड़ने वाला सेतु है। अपने प्रवचन के दौरान पं. अतुल कृष्ण महाराज ने क्षेत्र की जीवनदायिनी महानदी की महिमा का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने महानदी को महादेव का साक्षात स्वरूप बताते हुए कहा कि यह पावन नदी न केवल भौतिक जीवन का आधार है, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का भी स्रोत है। महानदी ने सदियों से इस क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और आस्था को सींचा है, इसलिए यह संपूर्ण अंचल के लिए ईश्वरीय वरदान है। रामकथा प्रारंभ होने से पूर्व विधिविधान से व्यास पूजन का आयोजन किया गया। आयोजक समाजसेवी पं. राजेश शर्मा एवं उनके परिवारजनों द्वारा व्यासपीठ का पूजन कर कथा वाचक का आशीर्वाद लिया गया। रामकथा के प्रथम दिवस पूर्व केबिनेट मंत्री एवं कुरूद विधायक अजय चंद्राकर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने व्यासपीठ के समक्ष नतमस्तक होकर कथा श्रवण किया और अपने उद्बोधन में कहा कि रामकथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शन है। महापौर रामू रोहरा ने कहा कि रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला आध्यात्मिक पर्व है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन चरित्र सत्य, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देता है। आज के भौतिक युग में जब समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे आयोजनों से मानसिक शांति, सद्भाव और नैतिक मूल्यों का विकास होता है। महापौर रोहरा ने आयोजकों को इस भव्य आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि नगर निगम धमतरी सदैव धर्म, संस्कृति और सामाजिक चेतना से जुड़े आयोजनों को सहयोग प्रदान करता रहेगा। पूरे आयोजन स्थल पर अनुशासन, श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। कथा स्थल को आकर्षक रूप से सजाया गया था, वहीं भजनों और मंगलाचरण ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। रामकथा महोत्सव के आगामी दिनों में प्रभु श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा पुरुषोत्तम के चरित्र, वनवास प्रसंग एवं भक्तों के जीवन में रामकथा की उपयोगिता पर विस्तार से वर्णन किया जाएगा। इस अवसर पर गोपाल शर्मा, राजेश शर्मा जितेंद्र शर्मा श्याम अग्रवाल जानकी प्रसाद शर्मा, दीपक लखोटिया, पूर्व विधायक रंजना साहू, अर्जुन पुरी गोस्वामी, मदन खंडेलवाल, राधेश्याम अग्रवाल, सुशील शर्मा, प्रकाश शर्मा, दिलीप सोनी, योगेश गांधी, देवेंद्र मिश्रा, राजेंद्र शर्मा, दीप शर्मा, नारायण दुबे, योगेश रायचूरा, महेंद्र खंडेलवाल, शंशाक मिश्रा, कुलेश सोनी, पिन्टू यादव, पप्पू शिंदे, शुभांक मिश्रा, सूरज शर्मा, अभिषेक शर्मा, भरत सोनी, अखिलेश सोनकर, संतोष सोनकर, दिलीप सोनी, पप्पू सोनी, मदन अग्रवाल, धनीराम सोनकर, आशीष जैन, प्रेम मगेन्द्र, डीएसपी रागिनी मिश्रा, हेमलता शर्मा, बरखा शर्मा, बिथिका विश्वास, सरला जैन, चंद्रकला पटेल, सरिता दोषी, सरिता यादव, रूखमणी सोनकर, ममता सिन्हा सहित राजमानस परिवार विप्र विद्वत परिषद के पंडित उपस्थित थे।
सद्भाव और संस्कारों का संरक्षण होता है- पं. शर्मा
इस अवसर पर आयोजक एवं समाजसेवी पं. राजेश शर्मा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धमतरी की पावन धरती सदा से ही धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना की भूमि रही है। ऐसे पवित्र वातावरण में रामकथा जैसे आयोजनों का होना समाज के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन चरित्र केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हर मनुष्य को सत्य, त्याग, मर्यादा और कर्तव्य का मार्ग दिखाता है। पं. शर्मा ने कहा कि आज के समय में जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों से गुजर रहा है, तब रामकथा जैसे आध्यात्मिक आयोजनों की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। इससे व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच, संयम और सेवा भावना का विकास होता है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल कथा श्रवण कराना नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक जागरण, पारिवारिक संस्कारों की पुनर्स्थापना और युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ना है। उन्होंने आगे कहा कि वे स्वयं को केवल आयोजक नहीं, बल्कि इस धर्मकार्य का एक सेवक मानते हैं। इस आयोजन में जुड़े प्रत्येक श्रद्धालु, कार्यकर्ता और सहयोगी उनके लिए परिवार के समान हैं। अंत में उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि भविष्य में भी धमतरी को धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र बनाने हेतु वे निरंतर प्रयासरत रहेंगे।

