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प्रकृति की गोद में स्थित सोंढुर बांध में नजारे है आकर्षक, लेकिन पर्यटन को नहीं मिल पा रहा बढावा

धमतरी। जिले में कई पर्यटक स्थल है जिनमें एक सोंढुर बांध भी है। जिला मुख्यालय से इसकी दूरी लगभग 90 किमी है यहां के नजारे मन को सुकुन देते है। पर्यटक यहां पहुंचते है। लेकिन पर्यटन को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। सुविधाओं की भी दरकार है। कुछ माह पूर्व कलेक्टर के निरीक्षण व यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों से सोंढुर बांध में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जगी है।
ज्ञात हो कि सोंढुर बांध प्रकृति की गोद में बसा एक बहुत ही सुंदर आकर्षक बांध है। जिसके नजारे मन और आंखो को सुकुन पहुंचाते है। बांध में साल भर पर्यटकों का आवागमन होता है विशेष कर बरसात और ठंड के मौसम में यहां का मौसम और प्रकृति के नजारे मनमोहक होते है। लेकिन यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को निराशा होती है। नववर्ष के मौके पर कई लोग यहां पहुंचे इनमें कुछ अन्य जिलों के लोग भी थे। जिन्होने कहा कि इतना आकर्षक बांध प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेल रही है। यहां पर्यटकों के सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा जाता। मूलभूत सुविधायें भी जैसे पेयजल मूत्रालय शौचालय, अच्छा भोजन या नाश्ते की व्यवस्था भी नहीं मिल पाती। साथ ही यहां बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले फिसलपट्टी या अन्य कोई विशेष साधन नहीं है। यहां सुसज्जित उद्यान की भी दराकार है जहां पर्यटक थोड़ा समय परिवार के साथ बिता सकें, पिकनिक कर सकें। यदि उक्त सुविधाओं का विकास सोंढुर बांध क्षेत्र में किया जाये तो निश्चित ही बांध पर्यटन के नक्शे पर तेजी से उभरेगा।
बांध के चारो ओर हरियाली की छटा बिखरी हुई है। बांध के समीप मुचकुंद ऋषि पर्वत है। अथाह पानी का संग्रहण होता है। जिससे दृश्य काफी मनोरम हो जाता है। यहां न सिर्फ धमतरी बल्कि कांकेर, बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, दुर्ग, रायपुर भिलाई, राजनांदगांव, गरियाबंद सहित प्रदेश के अन्य हिस्सो से लोग पहुंचते है। लेकिन सुविधाओं की कमी उन्हें खलती है। बांध में सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। शाम ढलते ही यहां आवाजाही बंद हो जाती है। कुछ शराबी किस्म के लोग पहुंचते है। कैमरे और गार्ड की आवश्यकता है।
वाटर स्पोर्टस को बढ़ावा देने की मांग
स्थानीय लोगो ने चर्चा के दौरान बताया कि जिस प्रकार गंगरेल पर्यटन को तेजी से विकसित किया जा रहा है। उसी प्रकार सोंढुंर बांध में भी पर्यटन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। यदि गंगरेल की तर्ज पर बांध में वाटर स्पोट्र्स को बढ़ावा दिया जाये तो यहां भी पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। बता दे कि सोंढुर बांध में 6.995 टीएमसी जल भराव की क्षमता है।
होमस्टे, दुकानों और सुविधाओं से बढ़ेगी रोजगार व पर्यटकों की संख्या
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने लगभग 4-5 माह पूर्व सोंढुर बांध पहुंचकर पार्क का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया था। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा था कि यह इलाका प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है और यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने सुझाव दिया था कि गांव में एक पर्यटक समिति का गठन किया जाए, जो पार्क के रख-रखाव और आसपास के क्षेत्र के विकास में सहयोग करे। कलेक्टर ने पार्क में सौंदर्यीकरण, बोटिंग सुविधा, पक्षियों और जानवरों की फोटोग्राफी व्यवस्था, बेहतर सड़कों का निर्माण तथा सड़कों के किनारे फूलदार पौधों के रोपण पर विशेष जोर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि पर्यटन केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को भी रोजगार उपलब्ध हो। इसके लिए उन्होंने होमस्टे व्यवस्था और छोटे-छोटे दुकानों की शुरुआत करने का सुझाव दिया था। इससे एक ओर जहां ग्रामीणों की आमदनी बढ़ेगी, वहीं पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव भी मिलेगा।
बांध एक नजर में
:- नदी -सोंढुर नदी
:- बांध स्थल – मेचका
:- जल संग्रहण क्षेत्र – 512 वर्ग किमी
:- बांध स्थल तक नदी की लम्बाई – 34 किमी
:- बांध स्थल पर नदी की चौड़ाई – 120 मीटर
:- सम्पूर्ण जल भराव क्षमता – 6.995 टीएमसी
:- गैर उपयोगी जल भराव क्षमता – 0.653 टीएमसी
:- उपयोग जल भराव क्षमता – 6.342 टीएमसी
:- कुल सैंच्य रुपाकिंत क्षमता – 34470 हेक्टेयर
:- बांध की चौड़ाई – 4.57 मीटर
:- बांध की लम्बाई – 3138.75 मीटर
:- अधिकतम ऊंचाई – 26.70 मीटर

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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