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यूजीसी बिल की आड़ में प्रधानमंत्री के विरुद्ध जातिसूचक टिप्पणी निंदनीय है-शत्रुहन सिंह साहू

ओबीसी संयोजन समिति छत्तीसगढ़ के संस्थापक अधिवक्ता शत्रुहन सिंह साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यूँजीसी बिल को लेकर असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक और संगठन का लोकतांत्रिक अधिकार है, किंतु इस विषय की आड़ में देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर सार्वजनिक रूप से अपमान करना न केवल व्यक्तिगत स्तर पर आपत्तिजनक है, बल्कि यह संपूर्ण साहू समाज के सम्मान, गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा का सामूहिक अपमान भी है।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी व्यक्ति विशेषकर देश के सर्वोच्च निर्वाचित पद पर आसीन प्रधानमंत्री को उसकी जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर अपमानित करना संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, गरिमा एवं बंधुत्व के मूल सिद्धांतों के प्रतिकूल है। इस प्रकार की भाषा समाज में वैमनस्य, घृणा और विभाजन को बढ़ावा देती है तथा यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा से बाहर का दंडनीय कृत्य है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सामाजिक पृष्ठभूमि को लक्ष्य बनाकर की गई टिप्पणी केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे साहू समाज को नीचा दिखाने और अपमानित करने की मानसिकता को दर्शाती है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।ओबीसी संयोजन समिति छत्तीसगढ़ इस प्रकार की असंवैधानिक, असभ्य एवं समाज को तोड़ने वाली टिप्पणियों की कड़े शब्दों में निंदा करती है तथा शासन-प्रशासन से यह मांग करती है कि ऐसे तत्वों के विरुद्ध, जो जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर प्रधानमंत्री पद की गरिमा और साहू समाज की अस्मिता को ठेस पहुँचा रहे हैं, उनके खिलाफ प्रचलित कानूनों के अंतर्गत तत्काल, निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।लोकतंत्र में विरोध का अधिकार अवश्य है, परंतु उसकी भी एक मर्यादा, भाषा और जिम्मेदारी होती है। देश की एकता, सामाजिक समरसता और प्रत्येक समाज के सम्मान की रक्षा हम सभी का साझा दायित्व है, और इसे कमजोर करने वाले किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

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