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रूद्री में मणिकर्णिका सा नजारा: भस्म और फाग के बीच शिव भक्तों में दिखा उत्साह, रूद्रेश्वर महादेव का हुआ विशेष श्रृंगार

कांशी की तर्ज पर रूद्रेश्वर घाट में मसाने की होली का हुआ आयोजन, सम्मान से भावुक हुईं किन्नर


धमतरी. धमतरी के रूद्रेश्वर महादेव घाट में कांशी की तर्ज पर मसाने की होली का भव्य आयोजन किया गया। धर्म और आस्था की त्रिवेणी रूद्रेश्वर घाट में कांशी के मणिकर्णिका घाट जैसा दृश्य जीवंत हो उठा। फाग गीत शुरू होते ही राख और फूलों की खुशबू महानदी तट पर तैरती रही। शुक्रवार शाम 6 बजे रूद्रेश्वर महादेव के अभिषेक के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। महादेव का दूध, दही, शहद, घी, फलों के रस, गन्ना रस, गंगाजल, जसवंती, पलाश, गेंदा, बेलपत्र, फूड़हर का फुलेरा, भस्म से विशेष श्रृंगार किया गया। पश्चात किन्नर दीपा शर्मा व उनकी टीम के सभी का आयोजकों द्वारा पूजा की गई। इस पूजा और सम्मान से सभी किन्नर भावुक हो गईं। समाज की मुख्यधारा से मिले इस सम्मान और स्नेह को देख किन्नर अपने आंसू नहीं रोक पाए। डॉ राकेश सोनी ने सस्वर शिव तांडव स्त्रोत का पाठ किया, जिससे वातावरण शिवमय हो गया। अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरण किया गया। इस अवसर पर राजमानस संघ के अर्जुनपुरी गोस्वामी, सियाराम साहू, दानीराम साहू, जेएल देवांगन, नेतराम यादव, सूर्याराव पवार, माधवराव पवार, विकास शर्मा, कैलाश सोनी, राजकुमार निषाद, अमनगिरी गोस्वामी, नरेश लुंकड़, राकेश लोढ़ा, देवेन्द्र राजपुरिया, अजय चौबे, नंदू यादव, लंकेश, राजवंश पवार, रानी सोनी, विनीता पवार आदि उपस्थित थे।
फाग गीतों पर दो घंटे तक थिरके भक्त
नदी तट में नगाड़े की थाप पर फाग गीतों पर किन्नर सहित उपस्थित शिव भक्त जमकर थिरके। भक्तों पर फूल, राख, अबीर उड़ाए गए। लगभग 2 घंटे तक श्रद्धालु फाग गीतों पर थिरके। इससे माहौल पूरी तरह से उत्सव में बदल गया। लोगों ने भी इस धार्मिक आयोजन की प्रशंसा की। स्वर्गधाम सेवा समिति के महासचिव अशोक पवार ने कहा कि कांशी की तर्ज पर यह आयोजन धमतरी में प्रथम बार हुआ। महादेव की कृपा से यह सब संभव हो पाया। अगले वर्ष कुछ नवाचार के साथ कांशी की तर्ज पर ही आयोजन करेंगे। अभिषेक, पूजा और मसाने की होली ने पर्व के पहले ही लोगों में होली का उत्साह भर दिया। अंत में उन्होंने उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।
मृत्यु अंत नहीं, महादेव के चरणों में एक उत्सव है: डॉ उपाध्याय
लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ रोशन उपाध्याय नें कहा कि रूदे्रश्वर घाट में कांशी की तर्ज पर पहली बार मसाने की होली का आयोजन हुआ। मसाने की होली के आयोजन के लिए प्रमुख रूप से 5 घटक होने चाहिए। पहला आयोजन स्थल में स्वयंभू ज्योतिर्लिंग होना चाहिए। दूसरा गंगाजी होनी चाहिए,यहां सामने चित्रोत्पला गंगा बह रही है, जिसे अब महानदी कहते हैं। यह साक्षात गंगाजी का स्वरूप है। तीसरा महाश्मशान होना चाहिए। मंदिर के बाईं ओर अत्यंत प्राचीन श्मशान है। चौथा घटक निर्जन क्षेत्र का होना। इसके आगे का क्षेत्र पूरा निर्जन है। पांचवां माघी पुन्नी का मेला लगना चाहिए।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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