कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने नहर लाइनिंग कार्य का किया निरीक्षण, 4426 हेक्टेयर रकबा होगा लाभान्वित
सोंढूर बांध से नगरी क्षेत्र को मिलेगी अतिरिक्त सिंचाई सुविधा

यह परियोजना नगरी क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण
समय-सीमा और गुणवत्ता पर विशेष जोर, सोंढूर नहर परियोजना से किसानों को मिलेगा लाभ
धमतरी-अबिनाश मिश्रा ने नगरी प्रवास के दौरान सांकरा के समीप प्रगति पर चल रहे सिंगपुर–दुगली नहर लाइनिंग कार्य का स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्य की गुणवत्ता, निविदा प्रक्रिया, भौतिक प्रगति, प्रस्तावित सिंचित रकबे तथा लाभान्वित होने वाले ग्रामों की विस्तृत जानकारी ली और अधिकारियों को समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि यह परियोजना नगरी क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने निर्देशित किया कि लाइनिंग कार्य में मानक सामग्री का उपयोग सुनिश्चित किया जाए, तकनीकी मापदंडों का कड़ाई से पालन हो तथा निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि नहरों की मजबूती और जल प्रवाह की सुचारु व्यवस्था से न केवल सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, बल्कि जल अपव्यय भी रुकेगा। यह परियोजना क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन विभाग बी.के. मगेंद्र ने जानकारी देते हुए बताया कि सोंढूर बांध से जुड़ी मुख्य नहरों के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के तहत सिहावा वितरक नहर (1) एवं नगरी वितरक नहर (2) का विकास किया जा रहा है। नगरी वितरक नहर की कुल लंबाई 30 किलोमीटर है। आरडी 17 किलोमीटर के दाईं ओर से दुगली–सिंगपुर नहर का 22 किलोमीटर विस्तार प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त 6 उप-वितरक शाखाओं सहित कुल 36 किलोमीटर लंबाई में कार्य किया जाएगा। परियोजना पूर्ण होने पर 4426 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
इस परियोजना हेतु छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा 60.53 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। नगरी वितरक शाखा के 0 से 17 किलोमीटर तक के कार्य को तीन पैकेज में विभाजित कर निविदा आमंत्रित की गई है। इनमें से दो पैकेज में कार्य प्रारंभ हो चुका है, जबकि एक पैकेज निविदा स्वीकृति की प्रक्रिया में है। दुगली–सिंगपुर नहर निर्माण से 46 हेक्टेयर वनभूमि प्रभावित हो रही है, जिसके एवज में 92 हेक्टेयर भूमि पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण प्रस्तावित है।
भूमि अर्जन दरों एवं विभागीय एसओआर दरों में वृद्धि तथा 0 से 17 किलोमीटर के मध्य प्रस्तावित डिजाइन में अतिरिक्त संरचनाएं एवं लाइनिंग कार्य जोड़े जाने के कारण परियोजना लागत में वृद्धि हुई है। संशोधित प्राक्कलन के अनुसार 173.28 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति हेतु प्रस्ताव शासन स्तर पर प्रक्रियाधीन है।
कलेक्टर श्री मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए, स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाए तथा प्रभावित किसानों से सतत संवाद बनाए रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत गजेन्द्र ठाकुर सहित अन्य अधिकारी साथ थे ।
परियोजना के पूर्ण होने पर नगरी एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे दोहरी फसल प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा, कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी तथा किसानों की आय में सकारात्मक सुधार की संभावना है। यह परियोजना जिले के दीर्घकालीन कृषि विकास और जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं भी सुनीं और आवश्यक सुझावों पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता है कि सिंचाई तंत्र को सुदृढ़ कर कृषि उत्पादन में वृद्धि की जाए और किसानों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।