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कलेक्टर ने कलारबाहरा में हो रही रागी की खेती का किया निरीक्षण

कम लागत, अधिक लाभ,रागी खेती से धमतरी के किसान सशक्त: कलेक्टर ने सराहा किसानों का नवाचार

धमतरी-जिले में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक एवं दूरगामी परिवर्तन के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। पारंपरिक धान फसल के साथ-साथ अब किसान फसलचक्र परिवर्तन को अपनाते हुए दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाजों की खेती की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। सरसों, चना, मक्का के साथ-साथ रागी (मंडुआ) की खेती में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है, जो न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि भूमि की उर्वरता संरक्षण एवं जल संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
इसी क्रम में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने आज ग्राम पंचायत अरौद का दौरा कर ग्राम कलारबहरा में किसान सगनूराम नेताम के खेत में लगी रागी फसल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसान से चर्चा करते हुए दस के लागत, आय, श्रम आदि की जानकारी लीं। किसान श्री नेताम ने बताया कि वह साल में 3 फसल लेता है। साथ ही खेत के पास डबरी निर्माण कर मछलीपालन भी कर रहा है, जिससे उसे अतिरिक्त आय हो रही है। इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री पीयूष तिवारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद वर्षा रानी सहित संबंधित अधिकारी, ग्रामीणजन एवं किसान उपस्थित रहे।

रागी फसल का निरीक्षण—कलेक्टर ने सराहा किसानों का नवाचार

ग्राम कलारबहरा में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री मिश्रा ने रागी की फसल की स्थिति, उत्पादन संभावनाओं एवं खेती की पद्धतियों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने खेत में कार्यरत किसानों एवं महिला कृषकों से संवाद कर रागी की खेती के लाभ, लागत एवं विपणन से संबंधित जानकारी प्राप्त की।कलेक्टर श्री मिश्रा ने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि रागी जैसी मोटे अनाज की फसलें भविष्य की कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह कम पानी में तैयार होने वाली, पोषक तत्वों से भरपूर एवं जलवायु अनुकूल फसल है, जो छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने, उन्नत बीजों के उपयोग एवं कृषि विभाग से निरंतर संपर्क बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

जिले में फसल विविधीकरण को मिल रहा बढ़ावा

धमतरी जिले में वर्तमान में रागी की खेती लगभग 1,250 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है, जिसमें करीब 1,180 किसान जुड़े हुए हैं। वहीं रबी मौसम में दलहन फसलों के अंतर्गत चना, अरहर एवं मसूर की खेती लगभग 18,450 हेक्टेयर क्षेत्र में की जा रही है। इनमें चना का क्षेत्रफल लगभग 14,200 हेक्टेयर, अरहर 2,150 हेक्टेयर एवं मसूर लगभग 2,100 हेक्टेयर है।

तिलहन फसलों में सरसों प्रमुख रूप से उगाई जा रही है, जिसका रकबा लगभग 8,300 हेक्टेयर है, जबकि अन्य तिलहन फसलें 1,300 हेक्टेयर में ली जा रही हैं। कुल मिलाकर जिले में तिलहन फसलें लगभग 9,600 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तारित हैं।

पोषण, पर्यावरण और आय—तीनों में संतुलन

रागी सहित मोटे अनाजों को बढ़ावा देने से किसानों को बहुआयामी लाभ प्राप्त हो रहे हैं। यह फसलें कम लागत, कम पानी और कम जोखिम के साथ बेहतर उत्पादन देती हैं, जिससे किसानों की आय में स्थायित्व आता है। साथ ही ये फसलें पोषण सुरक्षा को मजबूत करने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी सहायक हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत पहल

जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रागी खेती में देखने को मिल रही है। महिलाएं खेतों में रोपाई, निराई-गुड़ाई एवं प्रसंस्करण कार्यों में योगदान देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे न केवल उन्हें रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।

प्रशासन द्वारा निरंतर सहयोग
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि फसलचक्र परिवर्तन को प्रोत्साहित करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। दलहन, तिलहन एवं रागी जैसी फसलों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ पोषण सुरक्षा एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी सुनिश्चित किया जा सकता है।जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज, प्रशिक्षण एवं विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान कर वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में धमतरी जिले को दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाज उत्पादन का सशक्त केंद्र बनाने की दिशा में सतत प्रयास किए जाएंगे।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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