यश ने एमबीबीएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर बढ़ाया छाजेड़ परिवार व शहरवासियों का मान
जैन समाज में हर्ष, समाजजनों द्वारा उपलब्धि पर दी जा रही बधाई एवं शुभकामनाएं


धमतरी । धमतरी के एक मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले भोमराज छाजेड़ के बड़े पुत्र यश छाजेड़ ने एमबीबीएस की परीक्षा पास की। वर्तमान में भोमराज छाजेड़ एक बारदाना व्यवसायी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके है। जिस समय उनके पुत्र यश ने स्कूल की शिक्षा पूरी और आगे डॉक्टर बनने की इच्छा अपने पिता के सामने रखी। माँ वर्षा छाजेड़ का भी सपना था कि उनका पुत्र परिवार में पहला डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करे। पिता ने यह सुनकर एक पल अपनी वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखा लेकिन भले ही परिस्थिति विपरीत हो उन्होने पुत्र यश के डाक्टर बनकर समाजसेवा के क्षेत्र में आगे बढऩे की सोच को समर्थन दिया। इसके बाद यश ने आगे कोटा से नीट के परीक्षा की तैयारी प्रारंभ की। नीट की परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर एमबीबीएस के लिए रायपुर चले गए। वहां पर चार साल कड़ी मेहनत करके एमबीबीएस की परीक्षा प्राप्त की। रिजल्ट के आते ही परिवार में खुशी छा गई। पारिवारिकजनों और शुभचिंतको का बधाई संदेश आने लगा। घर में भी बधाई देने वालो का तांता लग गया। यश के एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण की उपलब्धि के अवसर पर शुभचिंतको द्वारा बधाई का तांता लगा हुआ है। बधाई देने वाले में अभय बरडिया, पिंटू डागा, आशीष मिन्नी, प्रशांत कोचर, महेंद्र खंडेलवाल, कुशल चोपड़ा, महावीर डागा, मितेश राखेचा, पप्पू बरडिया, भावेश लूनिया, मयूर पारख, भूपेश लूनिया, ललित पारख, गुड्डू कवाड़ सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
बेटे ने किया मां का सपना पूरा
यश के पिता भोमराज ने बताया कि मैने कभी भी बच्चों पर पढ़ाई के लिए अनावश्यक दबाव नहीं बनाया। यश प्रारंभ से ही पढ़ाई में अग्रणी था। जब यश ने डॉक्टर बनने की बात कही तो उनके मन में तत्काल यह भाव आया कि यह परिवार का पहला डॉक्टर बनेगा। जबकि छोटा पुत्र हर्ष वर्तमान में राइसमिल व्यवसायी के रूप में अपनी पहचान बनाने की ओर अग्रसर है । मां वर्षा छाजेड़ ने बताया कि उनका सपना था कि उनका बेटा आगे चलकर डॉक्टर बनें । और आज बेटे ने यह सपना पूरा कर दिखाया। माता पिता, चाचा चाची, भाई बहन सभी की आँखों में हर्ष के आंसू दिखाई दे रहे थे। क्योंकि छाजेड़ परिवार में यह पहला डॉक्टर है।
पिता के कठिन परिश्रम व समाजसेवा के कार्यों से मिली प्रेरणा
डॉक्टर यश ने बताया कि पिता को कठिन परिश्रम और समाजसेवा के कार्यों में अग्रणी देखकर उन्हें भी कठिन परिश्रम करने की प्रेरणा मिलती रही। और इसी का परिणाम है कि आज वह एमबीबीएस की परीक्षा पास कर पाया। वह इसका पूरा श्रेय अपने परिवार, शिक्षकों और शुभचिंतको को देते है।
