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सदगुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140 वें जन्मोत्सव का चालीहा अनुष्ठान हुआ प्रारम्भ

आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140 वें जन्मोत्सव का चालीहा महोत्सव धमतरी में स्वामी टेऊँराम नगर में स्थित श्री प्रेम प्रकाश आश्रम में प्रारम्भ हुआ आश्रम का भवन आध्यात्मिक दरबार के रूप में रात्रि 9.30 बजे सजकर शोभायमान हुआ लोगों में चालीसा महापर्व हेतु गजब का उत्साह झलक रहा था महापर्व के प्रथम दिवस के चालीसा पाठ एवं सत्संग कीर्तन के आयोजन का सौभाग्य मारवीजा परिवार को प्राप्त हुआ परिवार के सेवकराम महेशकुमार एव मनोज कुमार तीनों भाइयों ने मिलकर इस पुनीत कार्य का पुण्य प्राप्त किया
आज प्रार्थना,गुरु प्रार्थना अष्टक, कष्ट हरण अष्टक एवं सोलह शिक्षायें का पाठ किया गया तत्पश्चात आश्रम के प्रभारी संत लोकेशकुमार जी के सानिध्य में स्वामी टेऊँराम चालीसा का पाठ उपस्थित भक्तों ने स्वरबद्ध होकर किया. संत जी ने बताया सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज का मंगल प्राकट्य ईश्वर के द्वारा दिव्य अवतरण की अमर परंपरा का एक हिस्सा है इसका आध्यात्मिक आधार तप, भक्ति, संयम,साधना,आराधना,प्रेम,आत्म ज्ञान एवं परोपकार है भारतीय संत परंपरा में महापुरुषों का अवतरण केवल एक जन्म की घटना नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण हेतु ईश्वरीय योजना का दिव्य प्राकट्य माना जाता है। जब-जब संसार में धर्म, प्रेम, करुणा और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने की आवश्यकता होती है, तब ईश्वर अपने अंशस्वरूप संतों और महापुरुषों को इस धरती पर भेजता है। ऐसे ही युगद्रष्टा, कर्मयोगी, समाज सुधारक और मानवता के पथप्रदर्शक थे आचार्य श्री १००८ सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज, जिनका अवतरण केवल एक परिवार का सौभाग्य नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के लिए ईश्वर की अनुपम कृपा थी।संतों के जीवन का अध्ययन करने पर ज्ञात होता है कि उनके प्राकट्य के पीछे किसी न किसी महान तपस्या, त्याग, साधना और भक्ति की कथा अवश्य जुड़ी होती है। सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के अवतरण के पीछे भी उनकी पूज्य माता माता कृष्णा देवी की अद्वितीय श्रद्धा, अटूट विश्वास और चालीस दिवसीय कठोर साधना, तप का इतिहास जुड़ा हुआ है।

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