45 गांव के हजारों लोग पहुंचे कलेक्ट्रेट घेराव करने, विभिन्न मांगो के लिए किया आवाज़ बुलंद
समिति ने कहा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे 45 गांवों के आदिवासी मूलभूत सुविधाओं से है वंचित

धमतरी- जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति द्वारा आज कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंचे जहां क्षेत्र व समाज की विभिन्न मांगो को प्रमुखता से रखा गया.समाचार लिखें जाने तक पुलिस व प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को कलेक्ट्रेट मोड़ के पास ही रोका गया था.
वनाँचल के लगभग 45 गांव के हजारों ग्रामीण आज धमतरी पहुंचे और कलेक्ट्रेट के लिए पद यात्रा करते हुए निकले.समिति द्वारा बताया गया कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे 45 गांवों के आदिवासी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि वनांचल और दूरस्थ गांवों को मुख्य मागों से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण की मांग की गई है। अरसीकन्हार से गरहाडीही जंक्शन तक 25 किमी पक्की सड़क, गहनगिरिया से जोरातराई तक 25 किमी सड़क, खल्लारी से नवगांव तक 5 किमी सड़क, देवरी और बेलरबाहरा के आश्रित गांवों तक पक्की सड़क, बोरई, लिबमा, कुरीगांव, बहीगांव, बोरसील्ली के सभी आश्रित गांवों तक पक्की सड़क, खल्लारी से लिबमा तक 15 किमी सड़क निर्माण जरूरी बताया गया है। मांग पत्र में उजरावन के पास सोंदूर नदी पर 80 मीटर का पुल की मांग की गई है। खल्लारी के पास गरांजी नदी पर पुल बनाने की मांग भी रखी गई. जिले के रिसगांव, खल्लारी, फरसगांव, नवागांव-लीलांज के आश्रित गांवों में पर्याप्त बिजली सुविधा नहीं होने की बात कही गई है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि वन परिक्षेत्र अधिकारी रिसगांव ने सांकरा में आयोजित सुशासन शिविर के दौरान गोंडी धर्म और आदिवासी समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुईं। समिति ने संबंधित अधिकारी के निलंबन की मांग भी रखी है।
बता दे कि कलेक्ट्रेट घेराव के आवाहन के बाद नगरी एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों और पुलिस अफसरों ने समिति के पदाधिकारियों की रविवार को बैठक बुलाई जिसमे चर्चा की गई. लेकिन बात नहीं बनी और असंतुष्ट पदाधिकारी ने हजारों लोगो के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करने पहुंचे .

