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टाइगर रिजर्व क्षेत्र के 45 गांवों की उपेक्षा और आदिवासियों पर बल प्रयोग भाजपा सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण- तारिणी चंद्राकर

जिला कांग्रेस कमेटी आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के इस जन आंदोलन का पूर्ण समर्थन करती है

धमतरी:उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के 45 गांवों के हजारों आदिवासी भाई-बहनों द्वारा अपनी जायज मांगों को लेकर धमतरी जिला मुख्यालय में किए गए विशाल जन आंदोलन का जिला कांग्रेस कमेटी धमतरी ने पूरी तरह समर्थन किया है। जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमती तारिणी नीलम चंद्राकर ने एक बयान जारी कर सूबे की भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। तारिणी चंद्राकर ने कहा, यह बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश मे लम्बे समय तक शासन करने वाले भाजपा के राज मे आज भी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के 45 गांवों में रहने वाले हमारे आदिवासी भाई बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं। वनांचल के इन गांवों में आवागमन के लिए न तो ठीक से सड़कें हैं और न ही नदी-नालों पर पुल-पुलिया का निर्माण कराया गया है। इसके चलते खासकर बारिश के दिनों में ग्रामीण पूरी दुनिया से कट जाते हैं और गर्भवती माताओं व मरीजों को अस्पताल पहुंचाना नामुमकिन हो जाता है।उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों का भारी अभाव है, जिससे आदिवासी बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है। अस्पतालों में डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि एक दर्जन से अधिक गांवों में आज तक परंपरागत बिजली तक नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीण लंबे समय से इन विकास कार्यों की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन लगातार उनकी उपेक्षा कर रहा है।कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कलेक्ट्रेट घेराव के लिए निकले ग्रामीणों के ऊपर पुलिस द्वारा उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा, अपने हक और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से पैदल मार्च कर पहुंचे ग्रामीणों पर इस तरह का बल प्रयोग सरकार की तानाशाही और जनविरोधी नीति को दर्शाता है। वन विभाग विकास कार्यों में अड़ंगा लगाना बंद करे और प्रशासन इन जायज मांगों पर तुरंत लिखित व ठोस कार्रवाई शुरू करे. जिला कांग्रेस अध्यक्ष नें चेतावनी दी है कि यदि टाइगर रिजर्व क्षेत्र के इन गांवों में सड़क, बिजली, शिक्षा, मोबाइल नेटवर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर तुरंत धरातल पर काम शुरू नहीं किया गया, तो कांग्रेस पार्टी आदिवासियों के इस जल-जंगल-जमीन के संघर्ष में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

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