पाप करोगे तो दुख मिलेगा, पुण्य करोगे तो सुख – संत जी

धमतरी। आचार्य प्रवर सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140वें जन्मोत्सव के अवसर पर चल रहे चालीहा महापर्व के 33वें दिन गुरुभक्त बड़ी संख्या में शामिल हुए और बड़ी उमंग के साथ सत्संग का लाभ लेते हुए दिखाई दिए। 33वें दिन के कार्यक्रम का आयोजन अमरापुर निवासी सतरामदास वाधवानी के सुपुत्र गौरव वाधवानी के परिवार द्वारा किया गया था। इसमें संत जी ने सत्संग, प्रवचन एवं भजनों-दोहों के माध्यम से पाप-कर्म पर विशेष प्रकाश डाला। भजन के माध्यम से बताया गया कि पाप करोगे तो दुख मिलेगा, पुण्य करोगे तो सुख। इसलिए सोच-समझकर कर्म करो। साधु संगति, गुरु शरण और हरि नाम सुमिरन से ही भवसागर पार होगा। तन-धन का अभिमान छोड़ दो। जीते जी मरना का अर्थ है अहंकार को मार देना। आत्मज्ञान पाकर जीवन-मुक्ति में विचरना। लोक लाज, कुल लाज और देह लाज इन्हें त्यागकर ही गुरु शरण में जाया जाता है। भगवान से स्वर्ग, दर्शन और मुक्ति मांगने से पहले अपने कर्म ठीक करने होंगे। दिखावा नहीं, सच्चाई चाहिए। छल नहीं, सेवा चाहिए।
