सावन मास की शुरुआत के साथ शिवभक्ति में डूबा शहर, दुर्लभ संयोग ने बढ़ाया धार्मिक महत्व
भगवान शिव की आराधना, जलाभिषेक, कांवर यात्रा की तैयारियां पूरी

धमतरी। श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही जिले भर में शिवभक्ति का माहौल बनने लगा है। भगवान शिव को समर्पित सावन माह आज से प्रारंभ हुआ और इस बार कई शुभ संयोग बनने से इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। इस बार आज पहले दिन आष्युमान योग, सौभाग्य योग और श्रवण नक्षत्र का अत्यंत शुभ संयोग बना। जिसे पुण्य लाभकारी माना जाता है। पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा इस दिन श्रद्धालु रुद्रेश्वर घाट पहुंचकर कावंर में जल भरकर पदयात्रा करते हुए बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर पहुंचेंगे। और जलाभिषेक करेंगे। सावन का महीना शिव आराधना, व्रत, जलाभिषेक और आध्यात्मिक साधना का विशेष काल माना जाता है। ऐसे में शिवालयों में साफ-सफाई, सजावट और पूजा-अर्चना की तैयारियां पूर्ण हो गई हैं। श्रद्धालु पूरे माह भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा विशेष पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन मास भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। इस दौरान व्रत रखने, शिवलिंग पर जल एवं बेलपत्र अर्पित करने तथा महामृत्युंजय और नम: शिवाय मंत्र के जाप का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई शिव उपासना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिरों में विशेष पूजन और अभिषेक होगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक, धार्मिक अनुष्ठान और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। वहीं, सावन माह में कांवड़ यात्रा को लेकर भी उत्साह देखा जा रहा है। चारों सावन सोमवार को कांवडिय़ों के जत्थे पवित्र जल लेकर शिवालयों तक पहुंचेंगे और भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे। प्रशासन और मंदिर समितियों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि सावन मास में सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पूरे माह जिलेभर के शिव मंदिरों में धार्मिक आस्था और भक्ति का माहौल बना रहेगा।