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गंगरले पहुंचने वाले पर्यटक खुले में फेंक रहे प्लास्टिक डिस्पोजल, बॉटल, भोजन अवशेष अन्य कचरा

मंदिर के आसपास, सड़क व बांध क्षेत्र में वातावरण हो रहा दूषित, स्वच्छता को लेकर लोगों में जागरुकता की है कमी

प्लास्टिक और पॉलीथीन जैसे अपशिस्ट लंबे समय तक नहीं होते नष्ट, जलाशय व आसपास के प्राकृतिक वातावरण को नुकसान की रहती है आशंका

धमतरी । जिले के प्रमुख पर्यटन एवं आस्था केंद्र गंगरेल बांध और माँ अंगारमोती मंदिर में प्रत्येक सप्ताह बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से शुक्रवार और रविवार को यहां हजारों की संख्या में लोग माता के दर्शन करने आते हैं। कई श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर वर्षों से चली आ रही पौराणिक परंपरा के अनुसार बकरे की बलि भी चढ़ाते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ-साथ मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में गंदगी की समस्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद कई लोग प्लास्टिक की बोतलें, डिस्पोजल ग्लास, पत्तल, पॉलीथिन, भोजन के अवशेष तथा अन्य कचरा खुले में छोड़कर चले जाते हैं। इससे मंदिर परिसर, सड़क किनारे और गंगरेल जलाशय के आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सप्ताहांत के बाद मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में कचरा बिखरा दिखाई देता है, जिससे न केवल परिसर की सुंदरता प्रभावित होती है बल्कि पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। प्लास्टिक और पॉलीथिन जैसे अपशिष्ट लंबे समय तक नष्ट नहीं होते, जिससे जलाशय और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। क्षेत्रवासियों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से मांग की है कि प्लास्टिक के उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान चलाया जाए। साथ ही श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे धार्मिक आस्था के साथ अपनी सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भी निर्वहन करें तथा कचरा निर्धारित स्थान पर ही डालें। गंगरेल बांध और माँ अंगारमोती मंदिर धमतरी जिले की धार्मिक एवं पर्यटन पहचान हैं। ऐसे में इन स्थलों की स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन के साथ-साथ प्रत्येक श्रद्धालु की भी जिम्मेदारी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बढ़ती गंदगी भविष्य में पर्यावरण और पर्यटन दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
शराबी करते है माहौल खराब
विशेषकर शुक्रवार और रविवार को गंगरेल पहुंचने वाले कई पर्यटक शराब का सेवन करते है और नशे में हुल्लड़, वाद-विवाद, गाली गलौज करने से भी बाज नहीं आते। इससे माहौल खराब होता है। इस दौरान महिलाये, युवतियां बच्चें भी मौजूद रहते है। इसलिए पुलिस द्वारा औचक निरीक्षण कर खुलेआम शराबखोरी करने वालों पर कार्रवाई या समझाईश दी जा सकती है। ताकि मंदिर परिसर की गरिमा और माहौल बेहतर बना रहे। साथ ही विवाद व लड़ाई झगड़े की नौबत न आये।

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