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छत्तीसगढ़ में जमीन की नवीन गाइडलाइन एवं स्टाम्प ड्यूटी पर हो पुनर्विचार-मितेश जैन

अध्यक्ष जन जागरण सेवा समिति ने कहा प्रदेश में पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे मध्यम एवं निम्न आय वर्ग के लिए जमीन क्रय करना और अधिक कठिन हो गया है

मितेश जैन अध्यक्ष जन जागरण सेवा समिति धमतरी, छत्तीसगढ़ ने कहा कि
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2025–26 के लिए जमीन की नवीन गाइडलाइन दरें जारी किए जाने के बाद आम नागरिकों, किसानों, व्यापारियों एवं रियल एस्टेट से जुड़े लोगों में चिंता का माहौल है। नई गाइडलाइन दरों में कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिसके परिणामस्वरूप भूमि पंजीयन के समय देय स्टाम्प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्क में भी भारी बढ़ोतरी हुई है।प्रदेश में पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे मध्यम वर्ग एवं निम्न आय वर्ग के लिए जमीन क्रय करना और अधिक कठिन हो गया है। वहीं आवासीय, व्यवसायिक एवं औद्योगिक निवेश पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। बढ़ी हुई स्टाम्प ड्यूटी के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिससे शासन के राजस्व पर भी दीर्घकालीन असर पड़ सकता है। शासन एवं संबंधित विभागों से यह मांग की जा रही है कि
नवीन गाइडलाइन दरों का व्यावहारिक एवं क्षेत्रवार पुनर्मूल्यांकन किया जाए।स्टाम्प ड्यूटी की दरों में जनहित में रियायत प्रदान की जाए।ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए अलग गाइडलाइन नीति लागू की जाए।
आम नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों से परामर्श के बाद अंतिम निर्णय लिया जाए।
जनहित में यह आवश्यक है कि जमीन की गाइडलाइन एवं स्टाम्प ड्यूटी ऐसी हो, जिससे न केवल शासन को राजस्व प्राप्त हो बल्कि आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ भी न पड़े। शासन से अपेक्षा है कि वह जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय जल्द लेंगे।

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