गंगरेल बांध में मिली 37 साल पुरानी भगवान नेमिनाथ की संगमरमर प्रतिमा, आभूषण गायब; जांच शुरू

धमतरी। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) के जलस्तर क्षेत्र से तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ जी की एक दुर्लभ एवं ऐतिहासिक संगमरमर की मूर्ति बरामद की गई है। लगभग 37 वर्ष प्राचीन बताई जा रही यह प्रतिमा 12 अगस्त की रात को धमतरी स्थित जैन मंदिर में पूरे आदर-सत्कार के साथ लाई गई। मूर्ति पर संवत 2046 उत्कीर्ण है, जो इसकी प्राण प्रतिष्ठा के समय को दर्शाता है।
बोटिंग चालकों को दिखी मूर्ति
जानकारी के अनुसार, गंगरेल बांध में नौकायन (वोटिंग) का संचालन करने वाले लोगों को पानी के पास यह प्रतिमा दिखाई दी। उन्होंने स्थिति को समझते हुए तुरंत इसकी सुरक्षा सुनिश्चित की और स्थानीय लोगों को सूचित किया। सूचना मिलते ही 12 अगस्त की देर रात जैन समाज के प्रतिनिधि बांध पहुंचे और मूर्ति को ससम्मान धमतरी लाकर जैन मंदिर में स्थापित कराया।
11 इंच ऊंची सफेद संगमरमर की इस प्रतिमा का बारीकी से निरीक्षण करने पर पाया गया कि मूर्ति पर लगे बहुमूल्य आभूषण गायब हैं। इस पर धमतरी जैन समाज के अध्यक्ष विजय गोलछा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिमा बांध के पानी तक कैसे पहुंची, यह गंभीर जांच का विषय है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि किसी असामाजिक तत्व या चोरों द्वारा किसी मंदिर से मूर्ति चुराकर उसके सोने-चांदी के गहने उतार लिए गए होंगे और पकड़े जाने के डर से प्रतिमा को बांध के पानी में फेंक दिया गया होगा।
देशभर के जैन समाज को दी गई सूचना
धमतरी जैन समाज के अध्यक्ष विजय गोलछा ने बताया कि प्रतिमा मिलने और उस पर उत्कीर्ण संवत 2046 के आधार पर देशभर के जैन संघों एवं समाजों को इसकी सूचना भेज दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह प्रतिमा मूल रूप से किस स्थान या मंदिर की है।
फिलहाल, प्रतिमा के सुरक्षित जैन मंदिर में विराजमान होने से श्रद्धालुओं में भक्ति का माहौल है, वहीं पुलिस व समाज स्तर पर इसके मूल स्थान और गायब आभूषणों के संबंध में तफ्तीश की जा रही है।

