भखारा में निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण शिविर, पशुपालकों को मिला जागरूकता और सुरक्षा का संदेश
विश्व रेबीज दिवस : एक टीका—दोहरी सुरक्षा

धमतरी- किसी परिवार के लिए पालतू कुत्ता केवल एक पशु नहीं, बल्कि घर का सदस्य होता है। उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य से परिवार की सुरक्षा भी जुड़ी होती है। ऐसे में समय पर टीकाकरण केवल पशु के जीवन की रक्षा नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार और समाज को गंभीर बीमारी से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर शासकीय पशु चिकित्सालय भखारा, विकासखंड कुरूद में निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण शिविर आयोजित किया गया। सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत शिविर में पशुपालकों द्वारा लाए गए 5 कुत्तों का निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण किया गया। इसके साथ ही पशुओं का सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण कर पशुपालकों को उनके बेहतर स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण और सुरक्षित देखभाल के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई। शिविर के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पशुओं के प्रति जिम्मेदारी केवल उनके भोजन और देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि समय पर टीकाकरण भी जिम्मेदार पशुपालन का अनिवार्य हिस्सा है।
सावधानी से टल सकता है बड़ा खतरा
बैटनरी डॉ. पीयूष दुबे ने बताया कि रेबीज एक गंभीर और घातक बीमारी है, लेकिन इसकी रोकथाम काफी हद तक संभव है। इसके लिए सबसे प्रभावी उपायों में पशुओं का समय पर एंटी रेबीज टीकाकरण शामिल है। शिविर में पशुपालकों को बताया गया कि पालतू कुत्तों का नियमित टीकाकरण कराया जाए और उनके स्वास्थ्य एवं व्यवहार में होने वाले असामान्य बदलावों पर नजर रखी जाए।
पालतू पशुओं को अनजान अथवा आवारा पशुओं के अनावश्यक संपर्क से बचाने की सलाह भी दी गई। विशेष रूप से बच्चों को ऐसे पशुओं के पास जाने या उनके साथ खेलने से पहले सावधानी बरतने तथा पशु के व्यवहार में असामान्यता दिखाई देने पर तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करने के लिए जागरूक किया गया।
पशु के काटने पर ‘पहले 15 मिनट’ बेहद महत्वपूर्ण
शिविर में पशुपालकों को यह महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई कि यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध अथवा रेबीज संक्रमित पशु काट ले, तो घबराने के बजाय तत्काल प्राथमिक सावधानी अपनानी चाहिए। काटे गए स्थान को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए चिकित्सकीय परामर्श लेकर आवश्यक मानव एंटी रेबीज टीकाकरण एवं उपचार कराया जाना चाहिए।
विशेष रूप से लोगों को आगाह किया गया कि पशु के काटने पर घाव में मिर्च, तेल, मिट्टी, चूना या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं। सही समय पर सही उपचार ही संक्रमण से बचाव का प्रभावी माध्यम है।
पशु स्वास्थ्य से जुड़ी पहल, जनस्वास्थ्य की मजबूत कड़ी
विश्व रेबीज दिवस का संदेश केवल एक दिन तक सीमित नहीं है। यह अवसर समाज को यह याद दिलाता है कि पशु स्वास्थ्य और मानव स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण, जिम्मेदार पशुपालन, आवारा पशुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार और पशु के काटने पर तत्काल चिकित्सा सहायता—इन सभी प्रयासों से रेबीज की रोकथाम को मजबूत किया जा सकता है।
शासकीय पशु चिकित्सालय भखारा में आयोजित यह शिविर इसी सामूहिक जिम्मेदारी की दिशा में एक सार्थक कदम है। “रेबीज मुक्त समाज के लिए—अभी और सभी के लिए” की भावना को आधार बनाकर आयोजित शिविर ने पशुपालकों को जागरूकता के साथ सुरक्षा का संदेश दिया।
एक छोटे से टीके में एक बड़े उद्देश्य की सुरक्षा छिपी है—पशु की सुरक्षा, परिवार की सुरक्षा और समाज के स्वास्थ्य की सुरक्षा। यही जागरूकता रेबीज मुक्त समाज की आधारशिला बन सकती है।
