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लबालब हुआ गंगरेल बांध : 3850 क्यूसेक पानी की आवक, दो गेट व पेन स्टाक के माध्यम से छोड़ा जा रहा इतना ही पानी

348.50 मीटर हुआ बांध का लेवल, अधिकतम वाटर लेवल से है मात्र 20 सेंटीमीटर दूर


धमतरी। प्रदेश के दूसरे बड़े बांध गंगरेल में कल एक रेडियल गेट खोला गया था। पानी की आवक बनी रही इसलिए एक और गेट खोला गया। इस प्रकार दोपहर 12 बजे की स्थिति गंगरेल बांध के दो गेट खुले थे। बांध में 97 प्रतिशत जल भराव है।
ज्ञात हो कि गंगरेल बांध का अधिकतम वाटर लेवल 348.70 मीटर है। वर्तमान में 348.50 मीटर बांध का लेवल है। इस प्रकार बांध में पूर्ण जल भराव से बांध का वाटर लेवल मात्र 20 सेंटीमीटर दूर है। अधिकतम लेवल तक पानी पहुंच सकता था, लेकिन ऐतिहातन इसके पूर्व ही बाँध से डिस्चार्ज शुरु कर दिया गया है। आज गेट नम्बर 6 व 8 से 22 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं 1650 क्यूसेक पानी पेन स्टाक में भेजा जा रहा है। बता दे कि बांध में 3850 क्यूसेक पानी की आवक है और इतना ही पानी बांद से छोड़ा भी जा रहा है। बांध की क्षमता 32.150 टीएमसी है। कुल जल भराव 31.483 टीएमसी व उपयोगी जल भराव 26.412 टीएमसी है।
मुरुमसिल्ली, सोंढुर व दुधावा बांध की स्थिति भी अच्छी
बता दे कि जिले के अन्य बांधो की स्थिति भी वर्तमान में अच्छी है। मुरुमसिल्ली बांध की क्षमता 5.839 टीएमसी की है। वर्तमान में 5.75 टीएमसी जल भराव है। जिसमें 5.64 टीएमसी उपयोगी पानी है। इस प्रकार बांध में लगभग शत् प्रतिशत जल भराव है। दुधावा बांध की कुल जल संग्रहण क्षमता 10.192 टीएमसी है। वर्तमान में बांध में 8.845 टीएमसी जल भराव है। जिसमें उपयोगी जल भराव 8.865 टीएमसी है। इस प्रकार बांध में 87 प्रतिशत जल भराव है। वहीं सोंढुर बाँध की क्षमता 6.995 टीएमसी की है। वर्तमान में 4.392 टीएमसी जल भराव है। उपयोगी जल भराव 4.332 टीएमसी है। इस प्रकार 69 प्रतिशत से अधिक का जल भराव हो चुका है।
महानदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट, कलेक्टर ने अधिकारियों को सतत निगरानी एवं सुरक्षा के दिए निर्देश
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिलेवासियों से सतर्क और सुरक्षित रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जलाशयों में पानी की आवक एवं आगामी वर्षा को देखते हुए प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। महानदी एवं अन्य नदी-नालों के किनारे रहने वाले नागरिक नदी के जलस्तर में वृद्धि की स्थिति में तत्काल सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर चले जाएं। किसी भी परिस्थिति में नदी, नाला, जलभराव वाले क्षेत्र या तेज बहाव वाले पानी को पार करने का प्रयास नहीं करें। कलेक्टर ने संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व), तहसीलदारों, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, नगरीय निकायों तथा जल संसाधन एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विशेष रूप से महानदी किनारे बसे गांवों में मुनादी, सूचना तंत्र एवं स्थानीय अमले के माध्यम से ग्रामीणों को समय-समय पर जलस्तर की जानकारी देने तथा आवश्यकता पडऩे पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने कहा है। उन्होंने अधिकारियों को निचले एवं संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, राहत एवं बचाव दलों की तैयारी, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता तथा आपात स्थिति में त्वरित समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ग्राम स्तर पर कोटवार, पंचायत प्रतिनिधियों एवं स्थानीय अमले को भी अलर्ट मोड पर रखने कहा गया है।

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