विकास मरकाम और अरुण सार्वा के नेतृत्व में जंगल-जमीन संघर्ष समिति ने वन मंत्री के सामने रखी ग्रामीणों की आवाज
नियमानुसार जो भी बेहतर होगा, उन कार्यों को अवश्य करेंगे : केदार कश्यप
मंत्री ने कहा—क्षेत्र की समस्याओं से रूबरू होने स्वयं आएंगे, प्रतिनिधिमंडल ने जताई सकारात्मक पहल की उम्मीद

धमतरी । सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व क्षेत्र के गांवों में मूलभूत सुविधाओं की कमी और वनाधिकार से जुड़े विभिन्न मामलों को लेकर जंगल-जमीन संघर्ष समिति सीतानदी-उदंती के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप से मुलाकात की। स्थानीय आदिवासी स्वास्थ्य परम्परा एवं पादप औषधीय बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम एवं जिला पंचायत धमतरी के अध्यक्ष अरुण सार्वा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र की जमीनी समस्याओं से मंत्री को अवगत कराया तथा ग्रामीणों की मांगों से संबंधित विस्तृत आवेदन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सीतानदी-उदंती क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण लंबे समय से सड़क, पुल-पुलिया, बिजली सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। इसके साथ ही वनाधिकार से जुड़े मामलों तथा क्षेत्र में ग्रामीणों के सामने उत्पन्न हो रही विस्थापन संबंधी चिंताओं को भी मंत्री के समक्ष प्रमुखता से रखा गया। मंत्री केदार कश्यप ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि नियमानुसार जो भी बेहतर होगा, उन कार्यों को अवश्य करेंगे।इसके साथ ही उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे अतिशीघ्र नगरी-सिहावा क्षेत्र में स्वयं पहुंचकर क्षेत्र की समस्याओं से रूबरू होंगे और उनके निराकरण के लिए उचित पहल करेंगे। मंत्री के इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों और संघर्ष समिति में समस्याओं के समाधान को लेकर उम्मीद जगी है।
समस्याओं के निराकरण के लिए अब ठोस पहल की उम्मीद : विकास मरकाम
मुलाकात के बाद विकास मरकाम ने कहा कि सीतानदी-उदंती क्षेत्र के ग्रामीणों की समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। इन समस्याओं को गंभीरता के साथ वन मंत्री के सामने रखा गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की जरूरतों को देखते हुए नियमों के दायरे में आवश्यक विकास कार्यों का रास्ता निकाला जाना चाहिए।
विकास के साथ ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा जरूरी : अरुण सार्वा
अरुण सार्वा ने कहा कि जंगल क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण भी बेहतर जीवन और मूलभूत सुविधाओं के हकदार हैं। सड़क और पुल-पुलिया जैसी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को आवागमन सहित कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण के नियमों का पालन करते हुए ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकास कार्य किए जाने चाहिए। विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित करना जरूरी है।
