झीरम का फैसला आधा अधूरा न्याय, भाजपा नहीं चाहती झीरम का सच सामने आये :- तारिणी चंद्राकर

धमतरी। छत्तीसगढ़ के जनमानस के लिए गहरा घाव और न्याय की प्रतीक्षा का विषय है झीरम नक्सली मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी के 5 सितम्बर 2026 के फैसले के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी का पक्ष एवं इस पूरे प्रकरण से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने कहा कि 23 मई 2013 को हुये झीरम नरसंहार जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित 32 नेताओं की हत्या हुई थी। इस मामले में एनआईए कोर्ट का फैसला आया है। यह आधा अधूरा न्याय है, आगे कहा की हम न्यायलय के फैसले का आदर करते है, न्यायलय ने वही फैसला दिया है जो एनआईए ने तथ्य न्यायलय के सामने रखे थे, एनआईए की जांच शुरू से दिशाहीन रही है। एनआईए ने घटना के राजनैतिक षड्यंत्र के पहलू की जांच नहीं किया था, जिन 10 लोगों की एनआइए ने गिरफ्तारी किया था और जिनको दोषी पाया गया है वे छोटे नक्सली थे। इतनी बड़ी घटना बिना बड़े नक्सली नेताओं के संभव नहीं था, एनआईए ने बड़े नक्सली नेताओं का नाम शुरू के एफआईआर में शामिल किया था बाद में उसको हटा दिया, बड़ा सवाल यह है की इस फैसले से घटना के साजिस का पर्दाफाश नहीं हुआ है। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाया गया था? यात्रा के मार्ग को किसने, क्यों बदलवाया था? हमले की योजना किसने बनाया गया था? जब-जब बड़े नक्सलियों ने समर्पण किया तब सरकार ने दावा किया कि यह झीरम हमले में शामिल थे। एनआईए ने उनसे पूछताछ क्यों नहीं किया? घटना के प्रत्यक्षदर्शियों जो कि घायल भी थे उनमें से कितनों से एनआईए ने पूछताछ किया? झीरम हमले के दौरान घायल और जीवित बचे पीडि़तों का बयान तक नहीं लिया गया, कई बार प्रभावितों ने जांच एजेंसियो के समक्ष शपथ पत्र के साथ हाजिर हुए लेकिन उनके बयान शामिल ही नहीं किये गये। हत्याकांड के हफ्तों बाद भी शहीदों और घायलों के पर्स, फाईले, महत्वपूर्ण दस्तावेज बिखरे पड़े रहे, किसी का भी मोबाईल जप्त नहीं किया गया। एनआईए ने छत्तीसगढ़ सरकार की पुलिस क द्वारा गठित एसआईटी को जांच से क्यों रोका? एनआईए ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीसी नक्सल से कब पूछताछ किया तारिणी चंद्राकर ने आगे कहा कि भाजपा सराकार सच सामने लाना नहीं चाहती। शुरूआत में एनआईए की एफआईआर में दो प्रमुख नक्सली नेता गणपति (मुपल्ला लक्ष्मण राव), रमन्ना का भी नाम था, 21 मार्च 2014 को गणपति और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, फिर चार्ज शीट से उनका नाम क्यों हटाया गया? अगस्त 2014 तक इनका नाम था लेकिन सितंबर 2014 में जो अदालत में प्रारंभिक चार्जशीट तथा अंतिम चार्ज शीट में उनका नाम हटा दिया गया। यह क्यों हुआ इनका नाम क्यों हटाया गया? एनआईए की शुरूआती जांच में देवा (बार से सुक्का एलियास देवा) का नाम झीरम में शामिल नक्सलियों में था, एनआईए को वांछित भी घोषित किया था, उस पर ईनाम भी घोषित था, फिर उससे पूछताछ क्यों नही हुई? एनआईए ने जिन 26 लोगों को नामजद कर फरार घोषित किया था, उसमें बसवराजू, गणेश ऊइके, रूपेश ऊर्फ संजीव, सुरेन्द्र ऊर्फ रामचंद्र रेड्डी, जयदेव उर्फ बड्डा देव, सोनू उर्फ भूपति के नाम थे, इनमे से अनेको ने आत्मसमर्पण किया है। एनआईए ने उनसे पूछताछ कब किया? क्या उन्हें एनआईए ने निर्दोष मान लिया है।

