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ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय तपस्या भवन भखारा में मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

गुरु से ज्ञान और ज्ञान से सम्मान मिलता है - ज्योति हरख जैन

भखारा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय तपस्या भवन भखारा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एवं शिक्षक दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के वर्तमान एवं सेवानिवृत्त 16 शिक्षक-शिक्षिकाओं का श्रीफल एवं पुस्तक पेन भेंटकर ओम शांति परिवार एवं अध्यक्ष द्वारा सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्माकुमारी करुणा बहन जी, नगर पंचायत अध्यक्ष ज्योति हरख जैन, विधायक प्रतिनिधि हरख जैन,ब्रह्माकुमारी योगेश्वरी, उषा, माधुरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर श्रीकृष्ण की जीवन लीलाओं का सुंदर दर्शन कराया तथा उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ज्योति हरख जैन ने कहा कि “गुरु से ज्ञान मिलता है और ज्ञान से सम्मान मिलता है।” आज ज्ञान के माध्यम से विद्यार्थी डॉक्टर, इंजीनियर, वकील सहित विभिन्न उच्च पदों तक पहुंचते हैं, यह गुरु के मार्गदर्शन और शिक्षा से ही संभव होता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म को प्रधानता देते हुए कर्म करने का संदेश दिया है। हमें भी समाज को श्रेष्ठ देने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
इस अवसर पर आरडी सर ने कहा कि हमारा देश अनेक धर्मों, जातियों, परंपराओं और त्योहारों का देश है, जो हमारी समृद्ध संस्कृति की पहचान हैं। यदि जीवन में शांति चाहिए तो बौद्धिक उन्नति के साथ आध्यात्मिक उन्नति भी आवश्यक है। ब्रह्माकुमारी संस्था योग एवं आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से इसी दिशा में मार्गदर्शन प्रदान कर रही है।

श्रीकृष्ण के रूप में सजे बच्चे, फोड़ी दही-हांडी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चे आकर्षक श्रीकृष्ण के रूप में सजकर पहुंचे। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए और उत्साहपूर्वक मटकी फोड़कर दही-हांडी उत्सव मनाया। इस दौरान केक भी काटा गया। अतिथियों ने कहा कि श्रीकृष्ण के अनेक नाम गिरधर, गोपाल, वासुदेव और नंदलाल हैं तथा उनके जीवन में अनेक लीलाएं और संघर्ष देखने को मिलते हैं। श्रीकृष्ण की लीलाएं हमें अपने जीवन की कमियों, कमजोरियों और विकारों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देती हैं।

*वर्तमान समय परमात्मा के शिक्षा देने का समय — करुणा बहन जी*

ब्रह्माकुमारी करुणा बहन जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आप सभी शिक्षक ऐसे स्थान पर आए हैं, जहां शिक्षकों के शिक्षक, परम शिक्षक परमात्मा का ज्ञान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा हमें श्रेष्ठ जीवन जीने और नर से नारायण तथा नारी से लक्ष्मी बनने का लक्ष्य प्रदान करते हैं। वर्तमान समय परमात्मा के शिक्षा देने का समय चल रहा है।
उन्होंने कहा कि आज माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा के लिए विद्यालय और शिक्षकों को सौंपते हैं। बच्चे शिक्षा प्राप्त कर बड़े-बड़े पदों पर पहुंचते हैं, लेकिन कई बार नैतिक शिक्षा पीछे छूट जाती है। इसलिए आवश्यक है कि डिग्री के साथ नैतिक शिक्षा और संस्कारों को भी जीवन का हिस्सा बनाया जाए, ताकि बच्चे अपने माता-पिता, शिक्षकों और समाज का नाम रोशन कर सकें।कार्यक्रम में शिक्षक सम्मान, आध्यात्मिक संदेश, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं जन्माष्टमी उत्सव के माध्यम से ज्ञान, संस्कार और संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला।

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