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जहां कभी बह जाता था बारिश का पानी, अब वहीं लिखी जा रही समृद्धि की कहानी

कुकरेल में 200 से अधिक फार्म पॉन्ड बने जल संरक्षण और आजीविका का मॉडल, मछली पालन से ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय का अवसर


धमतरी। धमतरी जिले के आदिवासी अंचल नगरी विकासखंड के कुकरेल क्षेत्र में कभी बारिश का पानी बहकर निकल जाता था। खेतों में पानी का ठहराव नहीं होने से किसानों को सिंचाई के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आज वही पानी गांव की समृद्धि का आधार बन रहा है। वीबी-जी रामजी योजना के माध्यम से निर्मित फार्म पॉन्ड ने जल संरक्षण को आजीविका और अतिरिक्त आय से जोड़ते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। कुकरेल क्लस्टर में योजना के तहत 200 से अधिक फार्म पॉन्ड का निर्माण किया गया है। प्रत्येक डबरी का आकार लगभग 20 मीटर ़ 20 मीटर ़ 3 मीटर है। इन जल संरचनाओं में वर्षा जल का संरक्षण होने से किसानों को पानी की उपलब्धता का अतिरिक्त स्रोत मिला है। इससे खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों की संभावनाएं भी विकसित हुई हैं। इन्हीं डबरियों में अब आईएमसी और झींगा मछली पालन किया जा रहा है। प्रत्येक डबरी में लगभग 320 आईएमसी और 1600 झींगा मछली के बीज डाले गए हैं। निरंतर देखरेख और बेहतर प्रबंधन का परिणाम है कि आईएमसी मछलियां अब 400 से 500 ग्राम तक पहुंच चुकी हैं। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए कृषि के साथ अतिरिक्त आय का नया माध्यम तैयार हुआ है। इस पहल की खासियत केवल डबरी निर्माण तक सीमित नहीं है। लगभग 2.30 लाख रुपये की स्वीकृति के साथ जल संरचना को आजीविका से जोडऩे की दिशा में कार्य किया गया। साथ ही अइकर उरफ के सहयोग से तकनीकी प्रशिक्षण, सब्सिडी पर आहार की व्यवस्था तथा सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। इससे हितग्राहियों को मत्स्य पालन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी मिल रही है और उत्पादन को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। मछली पालन से ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है।

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