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पर्युषण पर्व का हुआ भव्य शुभारंभ, धर्मनगरी में गूंजा आत्मशुद्धि और संयम का संदेश

पर्युषण केवल पर्व नहीं, आत्मा को पहचानने और कर्मों की निर्जरा करने का अवसर है — साध्वीश्री रत्ननिधि जी


धमतरी। धर्मनगरी धमतरी के श्री पाश्र्वनाथ जिनालय, इतवारी बाजार में चातुर्मास हेतु विराजित परम पूज्य प्रवर्तनी महोदया कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका निपूर्णा श्री जी महाराज साहेब की सुशिष्या, प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्री जी महाराज साहेब की अंतेवासिनी परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में चातुर्मासिक धार्मिक प्रवचनों की श्रृंखला श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ निरंतर जारी है। इसी पावन क्रम में जैन समाज के महान आध्यात्मिक पर्व पर्युषण पर्व का आज प्रथम दिन श्रद्धा एवं धार्मिक उत्साह के साथ प्रारंभ हुआ। प्रवचन में साध्वीश्री रत्ननिधि जी महाराज साहेब ने कहा कि पर्युषण केवल कैलेंडर पर आने वाला कोई धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मा की ओर लौटने का अवसर है। मनुष्य पूरे वर्ष संसार की दौड़ में लगा रहता है। धन, परिवार, प्रतिष्ठा और भौतिक सुखों को पाने की कोशिश करता है, लेकिन पर्युषण उसे कुछ समय के लिए रुककर स्वयं से मिलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि पर्युषण का वास्तविक अर्थ है—अपने भीतर प्रवेश करना, आत्मा का चिंतन करना और जीवन में जमे हुए विकारों को दूर करने का प्रयास करना। यदि इन दिनों में हमारे भीतर क्रोध थोड़ा कम हो जाए, अहंकार थोड़ा झुक जाए, लोभ थोड़ा घट जाए और मन में क्षमा का भाव जाग जाए, तो समझना चाहिए कि पर्युषण की साधना सार्थक हो रही है। दूसरों को बदलने से पहले स्वयं को बदलें। क्रोध को क्षमा, अहंकार को विनम्रता और लोभ को संतोष से जीतें। सिर्फ पूजा नहीं, जीवन में धर्म उतारना जरूरी है।
कर्मों की निर्जरा का अवसर है पर्युषण
प्रवचन में कर्म सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए साध्वीश्री ने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों का स्वयं जिम्मेदार है। हमारे विचार, वाणी और कर्म ही हमारे जीवन को दिशा देते हैं। पर्युषण पर्व हमें अपने कर्मों को पहचानने, गलतियों का प्रायश्चित करने और आत्मशुद्धि की ओर आगे बढऩे की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि संसार में सबसे बड़ी विजय किसी दूसरे व्यक्ति पर विजय नहीं, बल्कि अपने क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार पर विजय है। जिसने अपने मन को जीत लिया, उसने वास्तविक अर्थों में स्वयं को जीत लिया।

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