पोला पर्व की तैयारी शुरू, मकई चौक में सजा बाजार
नांदिया बैल, पोरा-जाता और पूजा सामग्री की खरीदारी शुरु, बच्चों में उत्साह

धमतरी। जिले में किसानों के आस्था और परंपरा से जुड़े पोला पर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के मकई चौक सहित आसपास के बाजारों में मिट्टी और लकड़ी से बने नांदिया बैल, पोरा-जाता, खिलौने और पूजा सामग्री की दुकानें सज गई हैं। बच्चे अपने पसंदीदा रंग-बिरंगे नांदिया बैल खरीदने के लिए परिवार के साथ पहुंच रहे हैं। पोला पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति से जुड़ा प्रमुख त्योहार है, जिसमें किसान अपने बैलों की पूजा कर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
रंग बिरंगे नांदिया बैल बने आकर्षण
बाजार में छोटे-बड़े आकार के मिट्टी के नांदिया बैल, रंगीन पोरा-जाता, लकड़ी के खिलौने आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कुम्हारों व दुकानदारों ने बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए लाल, पीले, हरे और नीले रंगों से सजे मिट्टी व लकड़ी के बैलों की बड़ी खेप तैयार की है। कीमतें आकार और सजावट के अनुसार अलग-अलग रखी गई हैं, जिससे हर वर्ग के लोग अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग धमतरी पहुंचकर पर्व की खरीदारी कर रहे हैं।
किसानों के लिए विशेष महत्व
पोला पर्व किसानों के लिए केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि खेती-किसानी में बैलों के योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस दिन किसान अपने बैलों को स्नान कराकर उनके सींगों को रंगते हैं, नई रस्सी और घंटियां पहनाते हैं तथा विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं। कई गांवों में सजे-धजे बैलों की शोभायात्रा और पारंपरिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
